गोपाल इटालिया: निर्विरोध होने की होड़ में भाजपा ने गुजरात को यूपी-बिहार बनाने की कोशिश की

गोपाल इटालिया: निर्विरोध होने की होड़ में भाजपा ने गुजरात को यूपी-बिहार बनाने की कोशिश की

गोपाल इटालिया: भाजपा के ईमानदार कार्यकर्ताओं से अपील “भाजपा को रोको, आज विरोधियों का अपहरण हो रहा है, कल भाजपा के ही लोगों का अपहरण होगा”

आम आदमी पार्टी के विसावदर विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि 15 अप्रैल का दिन गुजरात के इतिहास में सबसे खराब अनुभव के रूप में कहा जा सकता है। हमारे गुजरात को बिहार और यूपी जैसी गुंडागर्दी वाला माहौल बनाने की कोशिश कल भाजपा द्वारा की गई। गुजरात के इतिहास में कभी न हुआ हो इतनी हद तक अपहरण की धमकियां, गुंडागर्दी, झूठी पुलिस FIR करने की और किसी भी तरह विपक्षी उम्मीदवारों के फॉर्म वापस हो जाएं ऐसी कोशिश भाजपा द्वारा की गई। मैं इस वीडियो के माध्यम से भाजपा के कार्यकर्ताओं से निवेदन करता हूं कि हम गुजरात को बिहार या अन्य राज्यों जैसा नहीं बनाना चाहते। वर्षों से हमने देखा है कि चुनाव के दौरान अपहरण, धाक-धमकी और अनियमितताएं बिहार या यूपी जैसे राज्यों में होती हैं, लेकिन गुजरात में ऐसी घटनाएं कभी नहीं होतीं। इस बार 700 से अधिक सीटों पर भाजपा ने निर्विरोध जीतने के लिए सत्ता का जो विकृत खेल खेला है, वह लोकतंत्र के लिए अत्यंत घातक है। भाजपा के कार्यकर्ताओं को फिलहाल अपनी पार्टी को निर्विरोध जीतता देखकर आनंद हो सकता है, लेकिन भविष्य में ऐसी परिस्थिति उन्हें भी भुगतनी पड़ सकती है। यदि कोई भाजपा का ही कार्यकर्ता कभी निर्दलीय के रूप में फॉर्म भरना चाहे, तो उसके साथ भी ऐसी ही घटनाएं हो सकती हैं। राजकोट के कोटडा सांगाणी क्षेत्र की एक घटना में भाजपा के ही एक व्यक्ति ने निर्दलीय के रूप में फॉर्म भरा था, तो उसका अपहरण होने की बात सामने आई है। यह परिस्थिति अत्यंत चिंताजनक है।

गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि गुजरात की परंपरा ऐसी नहीं है कि चुनाव में उम्मीदवारों का अपहरण किया जाए। गुजरात की परंपरा ऐसी नहीं है कि पूरे राज्य में विपक्षी दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों द्वारा भरे गए फॉर्म वापस करवाने के लिए पुलिस का दुरुपयोग किया जाए। कल LCB, SOG, SP ऑफिस और DYSP ऑफिस में बैठे कुछ भाजपा समर्थक अधिकारियों ने पूरे दिन दबाव बनाकर उम्मीदवारों के फॉर्म वापस करवाने का प्रयास किया। इस संबंध में हजारों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से देखा गया कि भाजपा के कुछ लोग और कुछ पुलिसकर्मी मिलकर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हम फॉर्म भरें, चुनाव लड़ें और हार जाएं तो भी स्वीकार्य है, लेकिन हमें फॉर्म ही न भरने देना या दबाव से वापस करवाना लोकतंत्र के विरुद्ध है। यह केवल आम आदमी पार्टी या कांग्रेस का नुकसान नहीं, बल्कि सामान्य नागरिक के मताधिकार पर सीधा प्रहार है। मतदान का अधिकार किसी ने भीख में नहीं दिया है।

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इस अधिकार के लिए भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों ने वर्षों तक संघर्ष किया, बलिदान दिए और देश को आज़ाद कराया। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने लंबे समय तक मेहनत करके भारत का संविधान बनाया, ताकि प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार मिल सके। आज यदि सत्ता का दुरुपयोग करके, धमकी देकर, पैसों का लालच देकर और पुलिस के दबाव में उम्मीदवारों के फॉर्म वापस करवाए जाते हैं, तो यह 200 वर्षों के संघर्ष से मिले अधिकार को छीनने की कोशिश समान है। इस घटना में केवल राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि हजारों मतदाताओं का नुकसान हुआ है, जिन्हें अपने मत का उपयोग करने का अवसर नहीं मिला। यदि ऐसी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, तो भविष्य में प्रत्येक चुनाव में यही परिस्थिति उत्पन्न होगी। मैं भाजपा के उन कार्यकर्ताओं से निवेदन करता हूं, जिनके विचार अच्छे हैं, कि वे अपनी पार्टी को ऐसे गलत मार्ग से वापस लाने का प्रयास करें। सत्ता का इस प्रकार दुरुपयोग अत्यंत गंभीर विषय है और इसे समय रहते रोकना आवश्यक है। आज यदि विपक्षी उम्मीदवारों को फॉर्म भरने में बाधा हो रही है, तो कल भाजपा के उम्मीदवारों को भी ऐसी ही परिस्थिति का सामना करना पड़ सकता है। चुनाव का मूल आधार यही है कि प्रत्येक दल को समान अवसर मिले और लोग अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।

गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि यदि किसी को फॉर्म ही न भरने देना हो, तो स्वतंत्रता से पहले जैसी परिस्थिति थी, तब तो किसी को फॉर्म भरने का अधिकार ही नहीं था। आज जो फॉर्म भरने का अधिकार मिला है, उसके लिए देश के महान पुरुषों ने 200 वर्षों तक संघर्ष किया, बलिदान दिए और उसके बाद यह व्यवस्था स्थापित हुई है। लेकिन आज कुछ भाजपा नेताओं में सत्ता का अहंकार आ गया है कि कोई दूसरा उम्मीदवार फॉर्म न भरे और केवल भाजपा के उम्मीदवार ही जीतें। मैं ऐसे नेताओं से निवेदन करता हूं कि सत्ता का अहंकार कभी स्थायी नहीं रहता। एक दिन ऐसा भी आएगा जब आप सत्ता में नहीं होंगे और कोई दूसरा आपके साथ उसी प्रकार तानाशाही करेगा, तब क्या करेंगे? सत्ता का उपयोग मर्यादा में होना चाहिए, अहंकार में नहीं। गुजरात को यूपी या बिहार जैसी परिस्थिति में बदलने से रोकने की जिम्मेदारी भाजपा के कार्यकर्ताओं, अन्य दलों के कार्यकर्ताओं और सामान्य जनता की है। मैं फिर से कहता हूं कि राजनीति में आलोचना, आरोप-प्रत्यारोप और मतभेद सामान्य बातें हैं, लेकिन गुजरात की संस्कृति में चुनाव में उम्मीदवारों को फॉर्म न भरने देने के लिए अपहरण या धमकी देने की परंपरा नहीं है। यह पहली बार ऐसा देखा गया है कि बड़े पैमाने पर उम्मीदवारों के फॉर्म दबाव से वापस करवाए गए। जो दृश्य देखने को मिले वे हिंदी फिल्मों में दिखाई देने वाली गुंडागर्दी जैसे लगे, जहां गुंडे गांव में घुसकर धाक-धमकी देते हैं। यह परिस्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। आज विपक्ष है इसलिए उस पर दबाव डाला जा रहा है, लेकिन यदि कल विपक्ष ही नहीं रहेगा तो फिर इस ताकत का उपयोग सामान्य जनता के खिलाफ होगा। आज विपक्ष जनता के लिए एक सुरक्षा दीवार है। यदि यह दीवार टूट जाएगी, तो सत्ता के लिए लालची और अत्यधिक सत्तालोलुप मानसिकता वाले लोग जनता के साथ क्या करेंगे, यह विचारणीय विषय है। इसलिए मैं जनता से निवेदन करता हूं कि वे जागरूक बनें, यह चुनाव स्थानीय स्वराज का है, लेकिन गुजरात को बिहार जैसी परिस्थिति में जाने से रोकने की जिम्मेदारी हम सबकी है। एक बार सत्ता के अहंकार को उतारना आवश्यक है।

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