देश में सोने और पेट्रोल की कीमतों पर सियासी बहस तेज होती जा रही है। इसी बीच आम आदमी पार्टी के नेता इसुदान गढ़वी ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और बढ़ते सरकारी खर्च को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पहले सरकारी खर्च में कटौती की मांग
इसुदान गढ़वी का कहना है कि अगर देश किसी आर्थिक संकट से गुजर रहा है, तो सबसे पहले सरकार को अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए। उनके अनुसार बड़े सरकारी कार्यक्रमों, राजनीतिक रैलियों और अधिकारियों की हवाई यात्रा जैसे खर्चों को कम करना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक दबाव की स्थिति में पहले बड़े उद्योगपतियों और अमीर वर्ग से योगदान लिया जाना चाहिए, न कि सीधे आम जनता पर बोझ डाला जाना चाहिए।
➡️ સોના અને પેટ્રોલના ખર્ચ મુદ્દે પ્રધાનમંત્રી મોદીએ દેશના નાગરિકોને અપીલ કરી હતી.
➡️ જો દેશ પર આર્થિક સંકટ છે તો પહેલા સરકારી ખર્ચે થતા કાર્યક્રમો, રેલીઓ, વિમાનના ખર્ચાઓ પર કાપ મૂકવામાં આવે, અધિકારીઓના ખર્ચ પર કાપ મૂકવામાં આવે, ઉદ્યોગપતિઓ પાસે કાપ મુકાવવામાં આવે અને ત્યાર પછી… pic.twitter.com/Wrj9T5aI7j
— AAP Gujarat (@AAPGujarat) May 12, 2026
प्रधानमंत्री से आर्थिक स्थिति पर स्पष्टीकरण की मांग
गढ़वी ने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि देश की आर्थिक स्थिति कमजोर क्यों हुई और मौजूदा कार्यकाल में महंगाई क्यों बढ़ रही है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता को देश की आर्थिक स्थिति की वास्तविक जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि मौजूदा चुनौतियों के पीछे क्या कारण हैं।
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जनता से सहयोग की अपील, लेकिन संतुलित जिम्मेदारी जरूरी
इसुदान गढ़वी ने यह भी स्वीकार किया कि अगर देश आर्थिक संकट में है, तो हर नागरिक को सहयोग करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह जिम्मेदारी संतुलित होनी चाहिए और इसका सबसे ज्यादा बोझ आम नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए।
बढ़ती कीमतों से बढ़ी राजनीतिक गर्मी
सोने और पेट्रोल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने देश में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। विपक्ष सरकार की आर्थिक नीतियों और खर्चों पर सवाल उठा रहा है, जबकि महंगाई और आर्थिक दबाव आम लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।