ग्लेन चैपल ने 1993 में महज 21 मिनट में फर्स्ट क्लास क्रिकेट का सबसे तेज शतक बनाया था। 32 साल बाद भी यह रिकॉर्ड टूटा नहीं है। जानिए इस तूफानी पारी और क्रिकेट करियर की पूरी कहानी।
क्रिकेट इतिहास में कई रिकॉर्ड्स आते हैं और जाते हैं, लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं जो कभी टूटते नहीं। इंग्लैंड के ऑलराउंडर ग्लेन चैपल ने 1993 में फर्स्ट क्लास मैच में महज 21 मिनट में शतक लगाकर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया था, जो आज 32 साल बाद भी कायम है। उनकी यह पारी 10 चौकों और 9 छक्कों से सजित थी, जो फर्स्ट क्लास क्रिकेट का सबसे तेज शतक माना जाता है।
ग्लेन चैपल ने 21 मिनट में बनाया सबसे तेज शतक
15 जुलाई 1993 को लंकाशर की टीम के लिए खेलने वाले ग्लेन चैपल ने ग्लेमोर्गन के खिलाफ मैच की दूसरी पारी में यह कमाल किया। जैसे ही चैपल बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर आए, उन्होंने गेंदबाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। महज 21 मिनट और 27 गेंदों में चैपल ने शतक पूरा कर लिया। इस पारी में उनके बल्ले से 10 चौके और 9 छक्के निकले, जो इस रिकॉर्ड को और भी खास बनाते हैं।
टूटा टॉम मूडी का रिकॉर्ड
चैपल ने पहले के रिकॉर्ड होल्डर ऑस्ट्रेलिया के टॉम मूडी का रिकॉर्ड तोड़ा था। मूडी ने 1990 में ग्लेमोर्गन की ओर से खेलते हुए केवल 26 मिनट में शतक लगाया था। ग्लेन चैपल ने मूडी का यह रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच दिया।
also read: भारत-वेस्टइंडीज टेस्ट सीरीज से पहले तेज गेंदबाज की चोट से…
मैच का संक्षिप्त विवरण
पहली पारी में लंकाशर ने 310 रन बनाए थे, जबकि ग्लेमोर्गन ने 303 रन पर अपनी पारी घोषित की थी। लंकाशर को जवाब में केवल 7 रन की बढ़त मिली थी। चैपल की धमाकेदार पारी के दम पर लंकाशर ने मात्र 12 ओवर में 235 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। ग्लेमोर्गन ने 243 रन का लक्ष्य 52.1 ओवर में हासिल कर लिया, लेकिन चैपल की पारी क्रिकेट इतिहास में अमर हो गई।
ग्लेन चैपल का क्रिकेट करियर
ग्लेन चैपल का घरेलू करियर शानदार रहा, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में उनकी किस्मत कमज़ोर रही। उन्होंने 2006 में इंग्लैंड के लिए वनडे डेब्यू किया, लेकिन उसी मैच में चोटिल होकर बाहर हो गए। इसके बाद उन्हें कभी इंग्लैंड की टीम में वापसी नहीं मिली।
आज भी कायम है चैपल का रिकॉर्ड
आज के तेज-तर्रार क्रिकेट और T20 के युग में भी कोई खिलाड़ी इतने कम समय में शतक नहीं बना पाया है। इसलिए ग्लेन चैपल की यह पारी क्रिकेट फैंस के लिए हमेशा एक लिजेंडरी किस्सा बनी रहेगी।