फाल्गुन पूर्णिमा 2026 पर चंद्र ग्रहण का समय, सूतक काल, स्नान-दान के नियम और पूजा विधि जानें। ग्रहण के बाद ताजा भोजन और भोग का महत्व।
फाल्गुन पूर्णिमा 2026: साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा का त्योहार बेहद खास होने जा रहा है। इस दिन न केवल होली का रंगों वाला पर्व मनाया जाएगा, बल्कि साल का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) भी लगने वाला है। जब पूर्णिमा और ग्रहण एक साथ पड़ते हैं, तो इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
फाल्गुन पूर्णिमा 2026 की तिथि और समय
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तिथि प्रारंभ: 2 मार्च 2026, सोमवार, शाम 5:55 बजे
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तिथि समाप्ति: 3 मार्च 2026, मंगलवार, शाम 5:07 बजे
शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत 2 मार्च को रखा जाएगा, जबकि स्नान और दान का शुभ समय ग्रहण के बाद 3 मार्च को माना जाता है।
ग्रहण और सूतक काल
3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण सुबह के समय शुरू होगा। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान मंदिरों के पट बंद रहते हैं और किसी भी शुभ कार्य या पूजा से परहेज करना चाहिए।
ग्रहण के दौरान और बाद में स्नान और दान
स्नान का महत्व:
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ग्रहण समाप्त होते ही घर पर या पवित्र नदी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
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घर में गंगाजल छिड़कें और खुद भी स्नान करें।
दान का महत्व:
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फाल्गुन पूर्णिमा पर सफेद वस्तुएं जैसे चावल, दूध, चीनी या चांदी का दान करना चंद्रमा को बल देता है।
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यह दान अक्षय फल देता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
मंत्र जप:
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ग्रहण के समय शांत बैठकर “ॐ नमः शिवाय” या चंद्रमा के बीज मंत्रों का जप करना फायदेमंद होता है।
व्रत और पूजा का विधान
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ग्रहण के प्रभाव के बावजूद श्रद्धा भाव में कमी नहीं आनी चाहिए।
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सुबह जल्दी उठकर संकल्प लें।
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सूतक काल में मूर्ति स्पर्श वर्जित है, इसलिए आप मानस पूजा कर सकते हैं।
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ग्रहण समाप्त होने के बाद ताजी मिठाइयां या फल भगवान को भोग के रूप में अर्पित करें और व्रत खोलें।
इस प्रकार, Falgun Purnima 2026 पर ग्रहण और पूर्णिमा दोनों का मिलन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ है। सही समय पर पूजा, स्नान और दान करने से आध्यात्मिक लाभ और मानसिक शांति दोनों प्राप्त होती है।