फेसबुक का लाइक और कमेंट बटन अब बाहरी वेबसाइट्स पर नहीं दिखेगा, मेटा ने लिया बड़ा फैसला

फेसबुक का लाइक और कमेंट बटन अब बाहरी वेबसाइट्स पर नहीं दिखेगा, मेटा ने लिया बड़ा फैसला

फेसबुक ने 2026 से बाहरी वेबसाइट्स पर लाइक और कमेंट बटन हटाने का फैसला लिया है। यह कदम पुरानी टेक्नोलॉजी को छोड़कर नई प्राइवेसी-फ्रेंडली सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए है। जानें क्या बदलाव होगा।

फेसबुक का लाइक और कमेंट बटन अब बाहरी वेबसाइट्स पर नहीं दिखाई देगा। यह बदलाव फेसबुक के वेब प्लगइन्स को लेकर किया गया है, जो ब्लॉग, न्यूज साइट्स और शॉपिंग वेबसाइट्स पर इस्तेमाल होते थे। फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने घोषणा की है कि फरवरी 2026 से इन पुराने प्लगइन्स को हटा दिया जाएगा।

2009 में लॉन्च हुआ लाइक बटन इंटरनेट का एक अहम हिस्सा बन चुका था। अब, मेटा ने इस फीचर को बंद करने का निर्णय लिया है, क्योंकि यह अब पुराना और कम उपयोग में आने वाला हो गया है।

क्या बंद हो रहा है?

अब से, फेसबुक के वेब प्लगइन्स, जैसे ‘लाइक दिस पेज’ और ‘कमेंट विद फेसबुक’, जो बाहरी वेबसाइट्स पर दिखते थे, अब हटा दिए जाएंगे। इन प्लगइन्स के माध्यम से उपयोगकर्ता फेसबुक अकाउंट से सीधे वेबसाइट पर लाइक या कमेंट कर सकते थे। अब यह फीचर बंद कर दिया जाएगा।

यह बदलाव केवल बाहरी वेबसाइट्स पर लागू होगा। फेसबुक एप या वेबसाइट में यह फीचर जैसा है वैसा ही बना रहेगा।

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मेटा ने क्यों लिया यह कदम?

मेटा का कहना है कि यह निर्णय डेवलपर्स के टूल्स को सिंपल और मॉडर्न बनाने के लिए लिया गया है। फेसबुक के ये प्लगइन्स अब 10 साल से पुराने हो चुके हैं और इनका उपयोग काफी कम हो चुका है। इसके अलावा, नए गोपनीयता नियम, डाटा शेयरिंग नीतियां और अन्य सोशल मीडिया ऐप्स के बढ़ते प्रभाव के कारण इनकी जरूरत अब पहले जैसी नहीं रही।

फरवरी 2026 के बाद क्या होगा?

फरवरी 2026 के बाद, जब यह बदलाव लागू होगा, तो बाहरी वेबसाइट्स पर लाइक बटन और कमेंट बॉक्स अपने आप गायब हो जाएंगे। इस बदलाव से वेबसाइट्स पर कोई खराबी नहीं आएगी, लेकिन डेवलपर्स के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपने कोड में से पुराने प्लगइन्स हटा लें।

क्या ‘लाइक बटन कल्चर’ अब खत्म हो जाएगा?

फेसबुक का लाइक बटन कभी इंटरनेट पर लोकप्रियता मापने का सबसे आसान तरीका था। ब्रांड्स और न्यूज साइट्स इसे सफलता का पैमाना मानते थे। लेकिन अब इंटरनेट का परिदृश्य बदल चुका है, और लोग कई ऐप्स पर बंटे हुए हैं। सोशल मीडिया एल्गोरिदम अब बाहरी वेबसाइट्स पर निर्भर नहीं करता, और प्राइवेसी अब सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन चुकी है। इस कारण मेटा अब पुराने फीचर्स को छोड़कर नई इनोवेशन और प्राइवेसी-केंद्रित तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

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