प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार सुबह पंजाब से राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल से जुड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसरों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए छापेमारी की। यह कार्रवाई जालंधर और फगवाड़ा सहित कई स्थानों पर एक साथ की गई, जिसमें उनके घर, संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल रहे।
सूत्रों के अनुसार, ईडी की टीमें सुबह लगभग 9 बजे दिल्ली से पहुंचीं और संबंधित परिसरों को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती की गई और अधिकारियों ने दस्तावेजों की गहन जांच की। वित्तीय लेन-देन और रिकॉर्ड्स को भी खंगाला गया।
जांच के दायरे में लवली ग्रुप से जुड़े कई संस्थान भी आए, जिनमें लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, लवली ऑटो, लवली स्वीट्स और लवली डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर जैसे प्रतिष्ठान शामिल हैं। अधिकारियों द्वारा इन संस्थानों से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
भाजपा द्वारा पंजाब चुनाव की तैयारी शुरू… आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद अशोक मित्तल के घर और यूनिवर्सिटी में ED की रेड..typical मोदी स्टाइल..
हम भो पत्ते नहीं
जो शाख से टूट कर
गिर जाएँगे
आंधियो को कह दो अपनी औक़ात में रहें— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) April 15, 2026
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई FEMA (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) के कथित उल्लंघन से जुड़ी जांच का हिस्सा है, जिसमें विदेशी फंडिंग और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ईडी की छापेमारी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे “विशिष्ट मोदी शैली” की कार्रवाई बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक रूप से दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, हालांकि उनकी पार्टी ऐसे कदमों से डरने वाली नहीं है।
इसी बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पंजाब में चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश है और भाजपा के खिलाफ जनता इसका जवाब देगी।
यह भी उल्लेखनीय है कि यह छापेमारी ऐसे समय पर हुई है जब हाल ही में राज्यसभा में नेतृत्व से जुड़े बदलावों के बाद अशोक मित्तल का नाम राजनीतिक रूप से चर्चा में था, जिससे इस कार्रवाई को लेकर सियासी बहस और तेज हो गई है।
AAP नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं, जबकि ईडी की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।