आज के समय में फिट रहना सिर्फ दिखने के लिए नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों से बचने और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए भी जरूरी है। अगर हम रोज़ वॉक या स्ट्रेचिंग जैसी बेसिक आदतें छोड़ देते हैं, तो इससे Bones इतनी कमज़ोर हो सकती हैं कि हल्की-सी ठोकर या गिरने से भी फ्रैक्चर हो जाए। रोज़ाना तेज़ चाल से की गई वॉक एक असरदार वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज है। जब हम चलते हैं, तो शरीर का भार पैरों पर आता है, जिससे हड्डियों पर दबाव पड़ता है और नई हड्डी कोशिकाएं बनने लगती हैं। इससे बोन डेंसिटी बनी रहती है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा घटता है।
स्ट्रेचिंग के लाभ क्या हैं?
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लचीलापन और मूवमेंट: स्ट्रेचिंग से मांसपेशियां लचीली बनती हैं और जोड़ों में मूवमेंट बना रहता है। इससे पॉश्चर सुधरता है और हड्डियों पर गैरज़रूरी दबाव नहीं पड़ता।
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बेहतर ब्लड सर्कुलेशन: स्ट्रेचिंग करने से रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे मांसपेशियों और हड्डियों को पोषण अच्छी तरह मिलता है।
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तनाव कम करता है: अगर आप दिनभर एक ही जगह बैठे रहते हैं तो स्ट्रेचिंग मांसपेशियों में जमा तनाव को कम करती है और शरीर को रिलैक्स महसूस कराती है।
हफ्ते में कम से कम 5 दिन, 30 मिनट की वॉक क्यों है जरूरी?
हफ्ते में कम से कम पांच दिन, आधा घंटा वॉक और हर दिन 10–15 मिनट की स्ट्रेचिंग से हड्डियों की मजबूती में सुधार आता है। लेकिन इसके साथ-साथ कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर डाइट लेना भी जरूरी है, वरना व्यायाम का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
क्या सिर्फ वॉक और स्ट्रेचिंग काफी हैं?
हालांकि वॉक और स्ट्रेचिंग बेहद जरूरी हैं, लेकिन पूरी तरह फिट रहने के लिए ये अकेले काफी नहीं।
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हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग,
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योग,
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संतुलित भोजन,
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और अच्छी नींद भी जरूरी है।
हर उम्र में फिट रहना संभव है—बस ज़रूरत है संतुलित रूटीन, अनुशासन और थोड़ी सी मेहनत की।
रोज़ाना की छोटी आदतें जैसे वॉक और स्ट्रेचिंग, हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। इन्हें अपनाकर आप न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं बल्कि मानसिक रूप से भी बेहतर महसूस करेंगे।