दिल्ली में SIR की समयसीमा बढ़ी। अब घर-घर सत्यापन 8 अगस्त तक होगा और अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर 2026 को जारी की जाएगी।
निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम की समयसीमा बढ़ा दी है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया 8 अगस्त 2026 तक जारी रहेगी, जबकि मतदाता सूची का मसौदा (Draft Electoral Roll) 17 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के पश्चात अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर 2026 को जारी की जाएगी।
पहले क्या था कार्यक्रम?
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी संशोधित कार्यक्रम से पहले घर-घर सत्यापन की अंतिम तिथि 29 जुलाई तय की गई थी और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 5 अगस्त को जारी होनी थी। अब दोनों तिथियों में बदलाव करते हुए मतदाताओं को अतिरिक्त समय दिया गया है ताकि पुनरीक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सटीक तरीके से पूरी हो सके।
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14 मई से शुरू हुई थी SIR प्रक्रिया
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का तीसरा चरण 14 मई 2026 से शुरू हुआ था। चुनाव आयोग के अनुसार इस चरण के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर देश के अधिकांश राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाए रखने के लिए समय-समय पर कार्यक्रम में आवश्यक बदलाव किए जाते हैं।
पंजाब में भी बदला गया शेड्यूल
दिल्ली के साथ-साथ पंजाब में भी SIR कार्यक्रम की समयसीमा बढ़ाई गई है। अब राज्य में घर-घर सत्यापन 3 अगस्त तक चलेगा। ड्राफ्ट मतदाता सूची 13 अगस्त को प्रकाशित होगी, जबकि 13 अगस्त से 12 सितंबर तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इनके निपटारे के बाद 12 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में भी बदलाव
निर्वाचन आयोग इससे पहले हरियाणा और आंध्र प्रदेश के लिए भी विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की समयसीमा बढ़ा चुका है। अब तेलंगाना और कर्नाटक में भी संशोधित कार्यक्रम लागू किया गया है, जिससे मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक व्यापक बनाया जा सके।
मतदाताओं से सहयोग की अपील
निर्वाचन आयोग ने सभी पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे घर-घर सत्यापन के दौरान आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं और यदि ड्राफ्ट सूची में कोई त्रुटि दिखाई दे तो निर्धारित अवधि के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज कराएं। इससे अंतिम मतदाता सूची अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाई जा सकेगी।