DELHI NEWS : दिल्ली में मौजूदा मोहल्ला क्लिनिकों को अब ‘शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपनी सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर 31 मई को करीब 33 नवनिर्मित स्वास्थ्य केंद्रों का उद्घाटन करेंगी। आइए देखें इन आधुनिक सुविधाओं की झलक।
दिल्ली में कई ‘शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ अब पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। इनमें से एक ने तीस हज़ारी कोर्ट परिसर में काम भी शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, अपनी सरकार के 100 दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के दौरान, 31 मई को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में लगभग 33 नए स्वास्थ्य केंद्रों का उद्घाटन करेंगी।
रेखा सरकार ने दिल्ली की कमान संभालने के बाद मौजूदा 553 मोहल्ला क्लिनिकों को ‘शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ (यू-एएएम) में बदलने का निर्णय लिया था। इन केंद्रों पर नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ योग कक्षाएं भी आयोजित होंगी। यह केंद्र हर हफ्ते रविवार को छोड़कर सुबह 9:30 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक मुफ्त चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
हर आरोग्य मंदिर में एक एमबीबीएस डॉक्टर प्रभारी रहेगा। मुख्यमंत्री ने हाल ही में बताया कि शहर में कुल 1,139 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना के लिए 1,749 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इनमें 14 प्रकार की जांचें ऑन-साइट की जाएंगी, जिनकी रिपोर्ट 30 मिनट के भीतर मिल जाएगी, जबकि 79 प्रकार की जांचें बाहरी लैब्स से कराई जाएंगी।
दिल्ली के ‘शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ में महिलाओं को गर्भपात से पहले और बाद में आवश्यक उपचार की सुविधा दी जाएगी। इन केंद्रों में वेलनेस सेंटर की व्यवस्था भी होगी, जहां सप्ताह में दो दिन योग कक्षाएं संचालित की जाएंगी। साथ ही, परिवार नियोजन संबंधी परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। ये आरोग्य मंदिर राष्ट्रीय स्तर के टीकाकरण अभियानों और स्वास्थ्य अभियानों से भी जुड़े रहेंगे।
हर दिन सुबह 9:30 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक यहां मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी। प्रत्येक केंद्र पर एक MBBS डॉक्टर प्रभारी होगा, साथ ही एक नर्स, मल्टी-पर्पस वर्कर और सफाईकर्मी की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है।
दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिक की शुरुआत वर्ष 2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद की गई थी। इस पहल के तहत 2022 के अंत तक राजधानी में कुल 553 मोहल्ला क्लिनिक स्थापित किए गए, जिनका उद्देश्य खासतौर से गरीब वर्ग और महिलाओं समेत सभी नागरिकों को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं देना था। हालांकि, बाद में इनमें गड़बड़ियों और संचालन में अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।