DELHI NEWS : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट Grok के साथ एक संवाद में शिक्षा नीति पर विस्तार से बातचीत की। यह पहली बार था जब किसी राजनीतिक नेता ने AI के साथ शिक्षा प्रणाली पर गहन चर्चा की। इस बातचीत में Grok ने दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल की सराहना की और माना कि यह मॉडल पूरे भारत में शिक्षा में क्रांति ला सकता है।
सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली का शिक्षा मॉडल कोई सरकारी योजना नहीं बल्कि उन लाखों परिवारों की आशा है, जिन्होंने फिर से अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने देखना शुरू किए हैं। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि शिक्षा एक साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी है, और राज्यों को अहंकार छोड़कर एक-दूसरे से अच्छे मॉडल अपनाने चाहिए।
उन्होंने बताया कि जब दिल्ली में शिक्षा सुधार की शुरुआत की गई थी, तब व्यवस्था बेहद जर्जर थी। लेकिन बुनियादी ढांचे के साथ-साथ उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षण, आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए हैप्पीनेस करिकुलम और बिजनेस ब्लास्टर्स जैसे कार्यक्रम लागू किए, जिनके अच्छे परिणाम सामने आए।
दिल्ली मॉडल के सात प्रमुख स्तंभ:
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इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार – नए क्लासरूम, लैब, शौचालय, और लाइब्रेरी का निर्माण।
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शिक्षकों का सशक्तिकरण – विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और सम्मान।
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पाठ्यक्रम नवाचार – हैप्पीनेस, आंत्रप्रेन्योरशिप, और देशभक्ति आधारित कोर्स।
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लीडरशिप और SMC – प्रिंसिपल को नेतृत्व की भूमिका, माता-पिता को भागीदारी।
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बुनियादी साक्षरता और निगरानी – प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर नजर।
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प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी – सरकारी स्कूल के छात्र NEET, JEE, NDA में उत्कृष्ट प्रदर्शन।
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जवाबदेही और ट्रैकिंग – सभी परिणामों की सार्वजनिक समीक्षा।
Grok की प्रतिक्रिया:
Grok ने भी दिल्ली मॉडल की ताकत को स्वीकार किया और सुझाव दिया कि इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के साथ जोड़कर देशभर में लागू किया जा सकता है। साथ ही केंद्रीय फंडिंग बढ़ाने, राज्यों में शिक्षक प्रशिक्षण अनिवार्य करने और डिजिटल निगरानी जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी होंगी।
परख सर्वेक्षण 2024 और राज्यवार प्रदर्शन:
सिसोदिया ने शिक्षा मंत्रालय के परख सर्वे 2024 के आंकड़े सामने रखते हुए बताया कि पंजाब कक्षा 3, 6 और 9 में देशभर में अव्वल है, जबकि दिल्ली कक्षा 9 में पांचवें स्थान पर है। गुजरात के छह जिले देश के सबसे पिछड़े 50 जिलों में शामिल हैं, जो चिंता का विषय है।
Grok ने भी इन आंकड़ों को लेकर चिंता जताई और कहा कि स्कूल बंद करने की नीति गलत है, क्योंकि 2015 से 2022 के बीच नामांकन में गिरावट और निजीकरण के चलते देशभर में 1 लाख से अधिक सरकारी स्कूल बंद या विलीन हो गए हैं।
बिहार के लिए सुझाव:
Grok ने कहा कि दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों का शिक्षा मॉडल बिहार जैसे राज्यों में अपनाया जाना चाहिए। बिहार में अभी भी बुनियादी ढांचे की भारी कमी है। राज्य सरकारों को शिक्षा में निवेश बढ़ाने की जरूरत है, ताकि वहां भी सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारी जा सके।
AI आधारित चैटबॉट Grok और मनीष सिसोदिया दोनों इस बात पर सहमत हैं कि दिल्ली का शिक्षा मॉडल केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे बिहार सहित पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए ताकि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सशक्त किया जा सके।