दिल्ली की झीलों को अमृत 2.0 परियोजना से नया जीवन, कुछ झीलें अभी भी सूखी

दिल्ली की झीलों को अमृत 2.0 परियोजना से नया जीवन, कुछ झीलें अभी भी सूखी

अमृत 2.0 परियोजना के तहत दिल्ली की झीलों को नया जीवन मिला। संजय झील सफल, नैनी, वेलकम और आया नगर झील अधूरी, सुधार जारी।

दिल्ली में अमृत 2.0 परियोजना के तहत कई झीलों का जीर्णोद्धार कर उन्हें नया जीवन दिया गया है। एमसीडी की 21 में से 18 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन नैनी, वेलकम और आया नगर झीलें अभी अधूरी हैं।

नैनी झील का काम स्थायी समिति की देरी से रुका

मॉडल टाउन स्थित नैनी झील के सुंदरीकरण में स्थायी समिति के गठन में देरी के कारण काम अभी शुरू नहीं हो पाया है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 10 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी, जिसमें झील की सफाई और एसटीपी से पानी की आपूर्ति शामिल है। अब स्थायी समिति के गठन के बाद परियोजना फिर से मंजूरी के लिए तैयार है।

आया नगर झील में सफाई का काम जारी

आया नगर झील का सुंदरीकरण एमसीडी द्वारा किया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा कचरा और गोबर डालने से झील में गाद जमा हो गई। फिलहाल सफाई का काम चल रहा है और पाइपलाइन बिछाकर एसटीपी से पानी पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय पार्षद शीतल चौधरी के अनुसार, अगले दो माह में परियोजना पूरी होने की संभावना है।

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वेलकम झील में एसटीपी के पानी की कमी

वेलकम झील का जीर्णोद्धार कार्य पूरा हो गया है, लेकिन झील अभी सूखी है। इसका मुख्य कारण एसटीपी को मिलने वाले नाले के पानी का डायवर्ट होना है। करीब डेढ़ साल पहले एसटीपी चालू हो चुका था, लेकिन अब पानी नहीं मिलने से झील में पानी नहीं भर पा रहा है।

संजय झील ने किया जीवंत प्रदर्शन

पूर्वी दिल्ली की संजय झील का जीर्णोद्धार सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। पानी भर जाने के बाद यह जगह अब नागरिकों और पक्षियों के लिए पिकनिक स्पॉट बन गई है।

भविष्य की योजनाएं

एमसीडी और दिल्ली सरकार का उद्देश्य इन झीलों के सुंदरीकरण से वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर में सुधार करना है। रोशनआरा पार्क की सूखी झील को नए रूप में विकसित किया गया है, जिसमें फुटपाथ और झूले लगाए गए हैं। एमसीडी की योजना है कि यहाँ रेस्तरां और नौका विहार जैसी सुविधाएं भी शुरू की जाएं।

दिल्ली में अमृत 2.0 परियोजना के तहत झीलों का जीर्णोद्धार राजधानी के जल संसाधनों और पर्यावरण सुधार में अहम भूमिका निभा रहा है, लेकिन अभी कुछ झीलों को पूरी तरह से जीवंत बनाने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है।

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