केंद्र सरकार के प्रस्तावित GST दरों में बदलाव को लेकर विपक्ष शासित आठ राज्यों ने आपत्ति जताई है।
हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने बैठक कर चिंता जताई कि इस बदलाव से 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये तक का घाटा हो सकता है। उनका कहना है कि मौजूदा GST राजस्व में 15–20% तक की कमी आने की आशंका है, जिससे राज्यों का बजट अस्थिर हो जाएगा।
बैठक के बाद कर्नाटक के वित्त मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने कहा कि जब जीएसटी लागू हुआ था तब राजस्व दर 14.4% थी, लेकिन युक्तिसंगत करने के बाद यह घटकर 11% पर आ गई। अब केंद्र का नया प्रस्ताव इसे और घटाकर 10% तक ला सकता है, जिससे राज्यों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि केंद्र कम से कम 5 साल तक क्षतिपूर्ति की गारंटी दे।
केंद्र ने जीएसटी को दो स्लैब (5% और 18%) में सीमित करने और लक्ज़री वस्तुओं पर 40% टैक्स लगाने का सुझाव दिया है। इस पर हिमाचल प्रदेश के मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि दरों का युक्तिसंगतकरण तो ठीक है, लेकिन मुआवजे की गारंटी जरूरी है। वहीं पंजाब के वित्त मंत्री ने सुझाव दिया कि टैक्स दरों में बदलाव का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचे, इसके लिए मुनाफाखोरी रोकने की ठोस व्यवस्था करनी होगी।
वर्तमान में राज्यों को जीएसटी से SGST और IGST के जरिए राजस्व मिलता है, जो 2024-25 बजट के अनुसार लगभग 12–13 लाख करोड़ रुपये है। विपक्षी राज्यों का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव से उनकी वित्तीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।