मणिकर्णिका घाट पर सियासी बवाल के बीच वाराणसी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बोले- काशी को बदनाम करने की साजिश

मणिकर्णिका घाट पर सियासी बवाल के बीच वाराणसी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बोले- काशी को बदनाम करने की साजिश

मणिकर्णिका घाट विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे। काशी विश्वनाथ और काल भैरव की पूजा के बाद बोले– काशी को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वाराणसी पहुंचे और उन्होंने भगवान काशी विश्वनाथ एवं भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना की। यह दौरा काशी में चल रही कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।

काशी विश्वनाथ धाम और काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी पहुंचकर सबसे पहले काशी विश्वनाथ धाम का अभिषेक किया और यहां पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने काल भैरव मंदिर में जाकर भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना की।

मणिकर्णिका घाट का स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री का वाराणसी दौरा विशेष रूप से मणिकर्णिका घाट के स्थलीय निरीक्षण के लिए अहम है। यहां चल रही परियोजनाओं का जायजा लेने के साथ-साथ उन्होंने कहा कि घाट पर चल रही गतिविधियों को लेकर गलतफहमी और बदनाम करने की साजिशें की जा रही हैं।

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काशी को मिली वैश्विक पहचान

योगी आदित्यनाथ ने प्रेस से बातचीत में कहा कि काशी अविनाशी है और हर सनातनी इसे श्रद्धा की दृष्टि से देखता है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में काशी का समग्र विकास हुआ है और अब काशी को वैश्विक पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में काशी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

काशी में चल रही विकास परियोजनाएं

मुख्यमंत्री ने बताया कि काशी में कई विकास परियोजनाएं चल रही हैं। नए संस्थान खुल रहे हैं और घाटों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि काशी में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं और पिछले वर्ष में 11 करोड़ लोगों ने काशी के विकास को देखा।

काशी को बदनाम करने की साजिशों पर योगी का बयान

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग काशी की विरासत को बदनाम करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज काशी में किसी को भय नहीं है और यहां किसी के साथ भेदभाव नहीं होता।

2014 से पहले की स्थिति

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2014 से पहले काशी की स्थिति खराब थी। घाटों का रख-रखाव ठीक नहीं था और काशी विश्वनाथ धाम में गंगाजल स्नान भी संभव नहीं था। लेकिन अब काशी में सड़कें फोरलेन से जुड़ी हैं, ट्रैफिक जाम कम हुआ है और यातायात सुविधाएं बेहतर हुई हैं।

मणिकर्णिका घाट का विकास और CSR योगदान

मुख्यमंत्री ने बताया कि मणिकर्णिका घाट का विकास CSR फंड से किया जा रहा है, सरकारी पैसों से नहीं। उन्होंने कहा कि घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लोग आते हैं और किसी को अपने प्रियजनों को सम्मानपूर्वक विदाई देने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

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