मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संस्कृत भाषा भविष्य में दुनिया को जोड़ने वाली भाषा होगी। सरकार संस्कृत के उत्थान के लिए छात्रवृत्ति और उच्च स्तरीय शोध पर कार्य कर रही है। वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में योगी ने महिलाओं के स्वावलंबन पर भी ज़ोर दिया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि आने वाले समय में संस्कृत भाषा ही दुनिया को जोड़ने वाली भाषा बनेगी। उन्होंने कहा कि संस्कृत का इतिहास बहुत प्राचीन और गौरवशाली है, जिसमें भारत का पहला विश्वविद्यालय तक्षशिला और महान व्याकरणाचार्य पाणिनि जैसे विद्वान शामिल हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्कृत के उत्थान के लिए सरकार की पहल बताई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के शिवपुर स्थित अन्नपूर्णा ऋषिकुल ब्रह्मचर्याश्रम संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित सिलाई-कढ़ाई और कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र के 14वें सत्रांत समारोह में भाषण देते हुए कहा कि सरकार संस्कृत के उत्थान के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकार छात्रवृत्ति, विद्यार्थियों के रहने-खाने की व्यवस्था और उच्चस्तरीय शोध पर विशेष ध्यान दे रही है।
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संस्कृत: दिव्य ज्ञान और आध्यात्मिकता की भाषा
सीएम ने महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित विश्व के पहले संस्कृत महाकाव्य का भी जिक्र करते हुए कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि दिव्य ज्ञान की भाषा है। इसमें आध्यात्मिक ज्ञान और भाव का समावेश है, जो विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
सरकार के मिशन शक्ति कार्यक्रम में महिलाओं का स्वावलंबन
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश में संचालित मिशन शक्ति कार्यक्रम के तहत सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य हो रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
महंत शंकर पुरी और अन्नपूर्णा आश्रम का योगदान
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अन्नपूर्णा आश्रम के महंत शंकर पुरी को कार्यक्रम के भव्य आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह मठ संस्कृत और वैदिक संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। साथ ही यहां गौसेवा और धार्मिक कार्य भी बड़े ही श्रद्धा के साथ किए जा रहे हैं।