उत्तर प्रदेश के CM Yogi Adityanath ने भूमि विवादों के समयबद्ध निस्तारण और भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान न सिर्फ जनता के भरोसे के लिए जरूरी है, बल्कि इससे राज्य में निवेश और विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। डिजिटलीकरण से शासन अधिक पारदर्शी, जिम्मेदार और भ्रष्टाचार-मुक्त बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली जन-केंद्रित, तकनीकी रूप से सक्षम और संवेदनशील होनी चाहिए।
अपने आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में CM Yogi Adityanath ने निर्देश दिए कि बचे हुए भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण जल्द पूरा किया जाए, और शहरी इलाकों के भू-अभिलेख प्राथमिकता के आधार पर पोर्टल पर सार्वजनिक किए जाएं। उन्होंने राजस्व परिषद के पोर्टल को और अधिक यूज़र फ्रेंडली बनाने की बात कही और लेखपाल से लेकर आयुक्त तक के लिए एकीकृत डैशबोर्ड तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे निगरानी और जनता को लाभ देना आसान हो।
CM Yogi Adityanath ने यह भी कहा कि प्राधिकरणों के भूमि उपयोग डेटा को खतौनी में दिखाया जाए और भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया (धारा 80 के अंतर्गत) को सरल और पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने नामांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह ऑटोमेट करने और चकबंदी में पारदर्शिता के साथ तकनीकी दखल देने के निर्देश दिए, ताकि सामाजिक विवादों से बचा जा सके।
CM Yogi Adityanath ने स्पष्ट किया कि अविवादित उत्तराधिकार (वरासत) के मामलों का निस्तारण अधिकतम 15 कार्यदिवसों में किया जाए। रियल टाइम खतौनी, आधार लिंकिंग, किसान रजिस्ट्रेशन, भूमि पैमाइश और खसरा पड़ताल जैसे मामलों को भी तय समय में हल किया जाए और जरूरत हो तो अतिरिक्त स्टाफ भी लगाया जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले साल 36 लाख से अधिक जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र जारी किए गए, जिनमें से 85% आवेदन सात कार्यदिवसों के भीतर पूरे कर दिए गए। उन्होंने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए सेवा प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्राकृतिक आपदा की स्थिति में विभाग द्वारा 3.5 लाख से अधिक प्रभावित परिवारों को DBT के माध्यम से सहायता देने के लिए सराहना की। साथ ही, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के सभी लंबित मामलों को अगले 10 कार्यदिवसों में निपटाने के आदेश दिए।