CM Yogi Adityanath ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान को सर्वोपरि माना गया है। उन्होंने गीता और उपनिषदों का हवाला देते हुए बताया कि ज्ञान से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में हुए बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश ने विरासत और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ना शुरू किया है।
CM Yogi Adityanath ने यह भी कहा कि भारत अब पहचान के संकट से उबर चुका है और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। निकट भविष्य में यह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और दिव्य महाकुंभ जैसे आयोजनों के ज़रिए भारत ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया है।
CM Yogi Adityanath ने रामायण के प्रसंगों से यह समझाने की कोशिश की कि भारत ने कभी बल से शासन नहीं किया, बल्कि सद्भाव और ज्ञान से दुनिया को प्रभावित किया। उन्होंने बुद्ध के संदेश और उनके वैश्विक प्रभाव की सराहना की, यह कहते हुए कि जापान, कोरिया और लाओस जैसे देश आज भी बौद्ध परंपरा से जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि विरासत और विकास का समन्वय हमारे जीवन को कल्याणकारी बनाएगा। 2014 के बाद भारत ने इस रास्ते पर तेजी से प्रगति की है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देकर ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।
CM Yogi Adityanath ने राज्य सरकार की विभिन्न शैक्षिक पहलों जैसे पी.एम. श्री स्कूल, अटल आवासीय विद्यालय, अभ्युदय कोचिंग योजना और ऑपरेशन कायाकल्प का ज़िक्र करते हुए बताया कि ये पहल शिक्षा को सुलभ और गुणवत्ता-युक्त बना रही हैं।
उन्होंने गुरु गोरक्षनाथ ज्ञानस्थली विद्यालय की शुरुआत को क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम बताया और कहा कि यह विद्यालय राष्ट्रीयता, संस्कृति और मूल्यों से जुड़ा हुआ होगा।
आख़िर में उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिरों की परंपरा को याद करते हुए शिक्षा में समाज के योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम में अन्य मंत्री, अधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।