Sunday, April 19, 2026

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया किताब का विमोचन, कहा ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’, स्थानीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर

by Neha
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया किताब का विमोचन, कहा 'बुके नहीं, बुक दीजिए', स्थानीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जय सिंह रावत की पुस्तक का विमोचन किया, कहा ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’ और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत की पुस्तक ‘उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास’ का विमोचन किया। इस अवसर पर सीएम ने किताबों के महत्व और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण पर जोर देते हुए नई पहल की शुरुआत की।

‘बुके नहीं, बुक दीजिए’ का संदेश

सीएम धामी ने समाज में किताब पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम में गुलदस्ते की जगह किताबें उपहार में दी जानी चाहिए। इससे न केवल पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ेगी, बल्कि लेखकों को भी प्रेरणा मिलेगी।

उन्होंने कहा, “इंटरनेट के युग में जानकारी तुरंत मिल जाती है, लेकिन किताबों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह किताबों की गहराई और स्थायित्व नहीं दे सकता।”

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पुस्तक में उत्तराखंड का राजनीतिक इतिहास

रावत की यह पुस्तक उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद के 25 वर्षों के राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक विकास का दस्तावेजीकरण प्रस्तुत करती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि पुस्तक में राज्य की राजनीतिक अस्थिरता के दौर का भी प्रामाणिक विवरण शामिल है, जिसमें दुर्लभ दस्तावेज और प्रेस कटिंग्स का उपयोग किया गया है।

स्थानीय भाषाओं का संरक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी जैसी स्थानीय भाषाओं के संरक्षण को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इन भाषाओं के डिजिटलाइजेशन पर ध्यान दे रही है ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने घरों और स्कूलों में स्थानीय भाषाओं का अधिक से अधिक उपयोग करें। इसके अलावा, सरकार स्थानीय भाषाओं में लेखन, शोध और डिजिटल कंटेंट बनाने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिताएं भी आयोजित कर रही है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी का यह कदम न केवल पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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