Saturday, April 18, 2026

चैत्र नवरात्रि 2026: माता के 18 शक्तिशाली मंत्र और दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व

by ekta
चैत्र नवरात्रि 2026: माता के 18 शक्तिशाली मंत्र और दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व

चैत्र नवरात्रि 2026 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाई जाएगी। जानें नौ दुर्गाओं की पूजा क्रम, माता के 18 शक्तिशाली मंत्र, दुर्गा सप्तशती का महत्व और मंत्र जाप विधि, जिससे मनोकामना और बाधाओं का समाधान होता है।

चैत्र नवरात्रि 2026 शुरू हो चुकी है। यह पर्व माँ दुर्गा की आराधना और महाशक्ति की पूजा का प्रमुख अवसर है। इस नवरात्रि में यदि कोई भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर पाता, तो माता के 18 शक्तिशाली मंत्र पढ़कर भी इच्छित फल प्राप्त किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इन मंत्रों का नियमित जाप करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

चैत्र नवरात्रि 2026 की तारीख और अवधि

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष चैत्र नवरात्रि निम्न तिथियों पर मनाई जाएगी:

  • प्रारंभ: 19 मार्च 2026, प्रातः 6:52 बजे (प्रतिपदा तिथि)

  • समाप्ति: 27 मार्च 2026, संध्या तक

इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना के साथ 19 मार्च से होगी। प्रतिपदा तिथि से ही नया हिंदू वर्ष प्रारंभ होता है।

नौ दुर्गाओं का महत्व और पूजा क्रम

नवरात्रि के नौ दिन देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दुर्गाओं ने देव-दानव युद्ध में विशेष भूमिका निभाई थी। उनके नाम और पूजा क्रम इस प्रकार है:

  1. शैलपुत्री – पहले दिन पूजा जाती हैं।

  2. ब्रह्मचारिणी – दूसरे दिन पूजा जाती हैं।

  3. चन्द्रघण्टा – तीसरे दिन पूजा जाती हैं।

  4. कूष्मांडा – चौथे दिन पूजा जाती हैं।

  5. स्कंदमाता – पांचवें दिन पूजा जाती हैं।

  6. कात्यायनी – छठे दिन पूजा जाती हैं।

  7. कालरात्रि – सातवें दिन पूजा जाती हैं।

  8. महागौरी – आठवें दिन पूजा जाती हैं।

  9. सिद्धिदात्री – नववें दिन पूजा जाती हैं।

दुर्गा सप्तशती और देवीकवच में इनके कार्य और शक्ति का विस्तृत वर्णन मिलता है।

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दुर्गा सप्तशती और देवीकवच का महत्व

दुर्गा सप्तशती महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित मार्कण्डेय पुराण का एक भाग है। इसमें देवी भगवती के 700 श्लोक हैं। पाठ के माध्यम से भक्त न केवल शक्ति और सुरक्षा प्राप्त करते हैं, बल्कि धन, स्वास्थ्य और मनोकामना की पूर्ति भी होती है।

  • दुर्गा सप्तशती पाठ नवरात्रि के प्रतिपदा से महानवमी तक किया जाता है।

  • पाठ में कवच, कीलक और अर्गला जैसे महत्वपूर्ण अंग शामिल हैं।

  • यदि समय की कमी हो, तो माता के 18 शक्तिशाली मंत्रों का जाप भी पर्याप्त है।

माँ दुर्गा के 18 शक्तिशाली मंत्र

  1. सर्वमंगलमंगलाय शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते।

  2. शरणांगतदीन आर्त परित्राण परायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवी नारायणि नमोऽस्तु ते।

  3. सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यारत्नाहि नो देवि दुर्गे देवी नमोऽस्तु ते।

  4. देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि।

  5. शरणागत-दीनार्त-परित्राण-परायणे। सर्वस्यार्तिंहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते।

  6. त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या। विश्वस्य बीजं परमासि माया।

  7. सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते।

  8. शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि: स्वनेन च।

  9. रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता हाश्रयतां प्रयान्ति।

  10. दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:. स्वस्थै स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।

  11. ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः। शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै।

  12. सर्व स्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते। भयेभ्यास्त्रहिनो देवी दुर्गे देवी नमोस्तुते।

  13. दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थ साधिके। मम सिद्घिमसिद्घिं वा स्वप्ने सर्व प्रदर्शय।

  14. नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:. नम: प्रकृत्यै भद्राये नियता: प्रणता: स्मताम्।

  15. सृष्टिस्थिति विनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि! नमोऽस्तुते।

  16. शांतिकर्मणि सर्वत्र तथा दु:स्वप्रदर्शने। ग्रहपीड़ासु चोग्रासु महात्मयं शणुयात्मम।

  17. दुर्गेदुर्गति नाशिनी जय जय।

  18. सर्व मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।

इन मंत्रों का जाप प्रतिदिन नवरात्रि के दौरान किया जा सकता है। नियमित जाप करने से माता दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।

नवरात्रि में मंत्र जाप की विधि

  1. प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें।

  2. देवी दुर्गा की मूर्ति या चित्र को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

  3. पंचोपचार या षोड्षोपचार पूजा करें (गंध, पुष्प, धूप, दीपक, नैवेद्य)।

  4. रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से मंत्र का जाप करें।

  5. जाप करते समय अपने मनोरथ का संकल्प लें।

  6. समयाभाव में केवल 10 बार मंत्र का जाप भी मां दुर्गा को प्रसन्न करता है।

विशेष सूचना

चैत्र नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ, शक्तिशाली मंत्रों का जाप और नौ दुर्गाओं की पूजा सभी प्रकार की बाधाओं, रोग, शत्रु भय, धन, स्वास्थ्य और मनोकामना की पूर्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं। यह पर्व भक्तों को साहस, शक्ति और कल्याण प्रदान करता है।

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