Monday, August 31, 2026

सेंट्रल कमेटी, ड्रोन तकनीक और 40 नए एसटीपी ,Delhi CM Rekha ने यमुना की सफाई की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

by editor
सेंट्रल कमेटी, ड्रोन तकनीक और 40 नए एसटीपी ,Delhi CM Rekha ने यमुना की सफाई की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

दिल्ली की CM Rekha Gupta ने यमुना सफाई की पूरी योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन की मदद से उन नालों की निगरानी की जा रही है, जिनका गंदा पानी यमुना में जाता है। इसके अलावा, 40 नए सेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को मंजूरी दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि यमुना को साफ करने के लिए 4,000 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना पर काम शुरू हो चुका है।

दिल्ली में यमुना की सफाई का मुद्दा समय-समय पर सामने आता रहा है, और CM Rekha की सरकार ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए सफाई का संकल्प लिया था। जब यमुना की सफाई को लेकर सीएम से सवाल किया गया, तो उन्होंने पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई।

CM Rekha Gupta ने बताया कि यमुना सफाई के लिए 20 अलग-अलग कमेटियों की बजाय सिर्फ एक सेंट्रलाइज कमेटी बनेगी, जिसमें केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, एमसीडी और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि यमुना में गिरने वाले नालों की पहचान ड्रोन सर्वे के जरिए की जाएगी और 40 नए सेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा, यमुना में प्रदूषण फैलाने वाली 67 स्थानों को भी चिन्हित किया जाएगा।

ड्रोन का कैसे होगा इस्तेमाल? (पुनः लेखन):
CM Rekha Gupta ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकारें यमुना की सफाई को लेकर गंभीर नहीं थीं, लेकिन अब केंद्र से लेकर दिल्ली तक इस मुद्दे को लेकर गंभीरता दिखाई दे रही है। इसी वजह से यमुना में गिरने वाले सभी नालों का सही आकलन करना ज़रूरी हो गया है। ड्रोन तकनीक की मदद से यह देखा जाएगा कि कौन-कौन से नाले यमुना में गिरते हैं, उनमें कितना पानी बहता है और उन्हें कैसे और बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। ये सारी जानकारियां ड्रोन सर्वे के माध्यम से जुटाई जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि बीते तीन महीनों में इन नालों से करीब 20 लाख मैट्रिक टन गंदगी हटाई गई है, हालांकि सफाई का काम अभी लंबा है।

यमुना सफाई की पूरी योजना का खाका:
सीएम ने बताया कि यमुना की सफाई के लिए 40 नए सेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) को मंजूरी दी गई है और 4,000 करोड़ रुपये की लागत से काम शुरू हो चुका है। मौजूदा एसटीपी को भी दोबारा सक्रिय किया गया है। उन्होंने पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले करीब 20 अलग-अलग समितियां काम कर रही थीं, जो आपस में समन्वय नहीं बना पा रही थीं। अब उन सभी को हटाकर एक नई सेंट्रलाइज कमेटी बनाई जा रही है, जिसमें सभी जरूरी विभागों के अधिकारी एक ही मंच पर बैठकर निर्णय लेंगे और उस पर सीधे अमल किया जाएगा।

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