Budget 2026-27: मिडिल क्लास और टैक्सपेयर्स की उम्मीदें, जानें क्या हो सकती हैं राहतें

Budget 2026-27: मिडिल क्लास और टैक्सपेयर्स की उम्मीदें, जानें क्या हो सकती हैं राहतें

Budget 2026-27: मिडिल क्लास और टैक्सपेयर्स की उम्मीदें, होम लोन, हेल्थ और पूंजीगत खर्च में राहत की संभावनाएं, जानें क्या बदल सकता है।

Budget 2026-27: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने जा रही हैं। यह उनके लगातार नौवें पूर्णकालिक बजट होंगे और पहली बार वह रविवार को बजट पेश करेंगी। देश के लाखों निवेशक, सैलरीड क्लास, किसान और महिलाएं इस बजट से मिलने वाली राहतों की उम्मीद लगाए बैठी हैं।

मिडिल क्लास और टैक्सपेयर्स की उम्मीदें

मिडिल क्लास और सैलरीड क्लास मुख्य रूप से टैक्स राहत और इन्वेस्टमेंट प्रोत्साहन की उम्मीद कर रहे हैं। निवेशक चाहते हैं कि बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने, टैक्स स्लैब को आसान बनाने, हाउसिंग लोन और इंश्योरेंस से जुड़ी अतिरिक्त छूट को शामिल किया जाए।

प्रॉपर्टी और होम लोन

होम बायर्स चाहते हैं कि होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट बढ़ाई जाए। वर्तमान में आयकर अधिनियम की धारा 24(b) के तहत ब्याज पर मिलने वाली छूट 2 लाख रुपये है, जिसे मौजूदा महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों के चलते पर्याप्त नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में टैक्स सेविंग और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा सकता है।

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स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार

बजाज ब्रोकिंग की रिपोर्ट के अनुसार, देश में हेल्थकेयर सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। बजट 2026-27 में इसके विस्तार की संभावना है, ताकि ज्यादा लोगों को कवर किया जा सके और लंबी अवधि के इलाज के लिए हेल्थ इंश्योरेंस योजनाओं का दायरा बढ़ाया जा सके। हालांकि, इसका असर निजी अस्पतालों के मुनाफे पर पड़ सकता है।

पूंजीगत खर्च (Capex)

अनंद राठी ब्रोकिंग के अनुसार, सरकार पूंजीगत खर्च में करीब 13% की वृद्धि कर 12.6 ट्रिलियन रुपये तक ले जा सकती है। अनुमान है कि कैपेक्स-टू-जीडीपी अनुपात लगभग 3.2% रहेगा। वहीं, आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है।

निवेशकों के लिए संकेत

इस बजट में मिडिल क्लास और निवेशकों को टैक्स राहत, स्वास्थ्य और इंश्योरेंस क्षेत्र में सुधार और पूंजीगत खर्च के जरिए निवेश के अवसर मिलने की उम्मीद है। सरकार के वर्तमान सुधारों को ध्यान में रखते हुए बड़े बदलाव की संभावना कम दिखाई दे रही है, लेकिन छोटे-छोटे प्रोत्साहन मिडिल क्लास के लिए राहत देने वाले हो सकते हैं।

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