संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने की बात कही।
पंजाब के संगरूर में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
केंद्रीय एजेंसियों पर लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि ये संस्थाएं निष्पक्ष काम करने के बजाय राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जिन राज्यों में भाजपा की सरकार नहीं है, वहीं पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई ज्यादा क्यों दिखाई देती है।
लोकतंत्र और संविधान पर चिंता
भगवंत मान ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि यह स्थिति संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने इसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया।
ਅੱਜ ਸੰਗਰੂਰ ਵਿਖੇ ਮੀਡੀਆ ਦੇ ਸਾਥੀਆਂ ਨਾਲ ਇੱਕ ਗੰਭੀਰ ਮੁੱਦੇ ‘ਤੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਗੱਲਬਾਤ ਕੀਤੀ। ਕੇਂਦਰ ਦੀ ਭਾਜਪਾ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਸੰਵਿਧਾਨਿਕ ਢਾਂਚੇ ਨਾਲ ਖਿਲਵਾੜ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਭਾਜਪਾ ਲਗਾਤਰ CBI, ED, ਇਨਕਮ ਟੈਕਸ ਅਤੇ ਚੋਣ ਕਮਿਸ਼ਨ ਵਰਗੀਆਂ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਸਿਆਸੀ ਫ਼ਾਇਦੇ ਲਈ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ।
ਆਖ਼ਿਰ ED ਦੇ ਛਾਪੇ… pic.twitter.com/cxQhiIKP2g
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) May 9, 2026
पंजाब को लेकर सख्त संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब गुरुओं और संतों की धरती है, जहां नफरत और विभाजन की राजनीति कभी सफल नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता किसी भी तरह के दबाव या डराने-धमकाने की राजनीति के आगे नहीं झुकेगी।
बेअदबी कानून पर टिप्पणी
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में लागू सख्त बेअदबी कानून के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ी है। उनके अनुसार इसी कारण केंद्र की ओर से दबाव की राजनीति तेज हुई है।
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सरकार का रुख
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दोहराया कि उनकी सरकार पूरी ईमानदारी के साथ जनता की सेवा कर रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार न झुकेगी और न ही रुकेगी।
राजनीतिक माहौल गरमाया
इस बयान के बाद राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। सत्ताधारी पक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाज़ी करार दे रहा है।