हरियाणा मंत्री अनिल विज ने कहा कि आगामी बजट मजबूत होगा, बिजली आपूर्ति सुधारेगी और ऊर्जा क्षेत्र में नई परियोजनाओं पर केंद्र सहयोग देगा।
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन और श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा है कि आगामी बजट जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेगा और इसे बहुत ही मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विज ने कहा कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह निर्वहन कर रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता में शामिल है।
अनिल विज ने बताया कि विद्युत व्यवस्था में सुधार करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। विज ने कहा कि राज्य भर में ट्रांसफार्मर और कंडक्टर अपग्रेडेशन बड़े पैमाने पर चल रहा है, विशेषकर गुरुग्राम और फरीदाबाद में। उन्होंने आश्वस्त किया कि ग्रीष्म ऋतु के बाद सर्दियों में बिजली आपूर्ति में किसी तरह की कमी या असंतुलन नहीं होगा।
राज्य के कर्ज और कांग्रेस के बयान पर टिप्पणी करते हुए विज ने तंज करते हुए कहा कि बजट अभी तैयार किया जा रहा है और सभी हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वयं विभिन्न विभागों के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि एक मजबूत बजट पेश किया जा सके।
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केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से मुलाकात पर विज ने कहा कि आज केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ ऊर्जा क्षेत्र के विकास पर चर्चा हुई, जिससे केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य के लोगों तक ऊर्जा योजनाओं का लाभ पहुंचे। उन्होंने बताया कि हिसार की खेदर इकाई के लिए कोयला लिंकेज केंद्र सरकार ने प्रदान किया है, जिससे नई यूनिट पर काम में तेजी आएगी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यमुनानगर में नई 800 मेगावाट यूनिट की आधारशिला रखी है।
कानून व्यवस्था पर चर्चा करते हुए विज ने कहा कि राज्य में लगभग 5,000 असामाजिक तत्वों को जेल भेजा गया है, जिससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि सरकार जिम्मेदारी से काम कर रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव पर सवाल के जवाब में अनिल विज ने कहा कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियों में केवल भारतीय जनता पार्टी ही आंतरिक लोकतंत्र के तहत चुनाव प्रक्रिया का पालन करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य पार्टियों में नेतृत्व वंशानुगत होता है और इसलिए उनमें लोकतंत्र का अभाव है।
विज ने स्पष्ट किया कि भाजपा में वार्ड, मंडल, जिला और राज्य स्तर पर चुनाव आयोजित किए जाते हैं, और इसके बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होता है। यह प्रणाली केवल भाजपा में लागू है।