Sunday, August 23, 2026

वन नेशन वन इलेक्शन मीटिंग के बाद AAP नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की

by Neha
वन नेशन वन इलेक्शन मीटिंग के बाद AAP नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की

वन नेशन वन इलेक्शन की जगह वन नेशन वन एजुकेशन, वन नेशन वन जस्टिस करो: इसुदान गढ़वी

गांधीनगर गिफ्ट सिटी में आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी, विधायक गोपाल इटालिया, विधायक चैतर वसावा, विधायक हेमंत खवा, प्रदेश संगठन मंत्री डॉ. करन बारोट और प्रदेश मंत्री अनुप शर्मा ने वन नेशन वन इलेक्शन मीटिंग में भाग लिया। इसके बाद आम आदमी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ईसुदान गढ़वी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज वन नेशन वन इलेक्शन के अंतर्गत चुनाव सुधार संशोधन को लेकर जो JPC की मीटिंग यहां आयोजित की गई थी, उसमें हमारे विधायकों और हमारी टीम ने अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।

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वन नेशन वन इलेक्शन मीटिंग में आम आदमी पार्टी ने लिखित रूप में JPC के सदस्यों और चेयरमैन को हमारे मुद्दे और पॉइंट्स दिए हैं। यह कैसे संभव हो सकता है? इतना बड़ा स्ट्रक्चर कैसे संभव हो सकता है? जब विधानसभा चुनाव होते हैं तो तीन-तीन, चार-चार चरणों में चुनाव आयोजित होते हैं, तो लोकसभा, विधानसभा और लोकल बॉडी चुनाव एक साथ कैसे हो सकते हैं? राज्य के मुद्दे अलग होंगे, लोकल बॉडी के मुद्दे अलग होंगे और राष्ट्र के मुद्दे अलग होंगे। साथ ही हमने तीसरा पॉइंट भी दिया है कि खर्च की जो बात की जाती है कि खर्च बढ़ जाता है, करोड़ों का खर्च होता है, तो लोकतंत्र बचाने के लिए यह खर्च गलत नहीं है। हमने मुद्दे दिए हैं कि वर्तमान में चुनाव आयोग का खर्च GDP का जीरो पॉइंट वन प्रतिशत जितना होता है और क्या हम लोकतंत्र बचाने के लिए इतना खर्च नहीं कर सकते? भारत एक लोकतांत्रिक देश है, भारत की पहचान विविधता में एकता है और सभी राज्यों के मुद्दे अलग-अलग हैं, राष्ट्र के मुद्दे अलग हैं। संविधान में बाबासाहेब द्वारा दिए गए फंडामेंटल राइट्स और स्ट्रक्चर में कहीं न कहीं इन पॉइंट्स का उल्लंघन होता है, ये मुद्दे भी हमने प्रस्तुत किए हैं।

इसुदान गढ़वी ने आगे कहा कि One Nation, One Election की जगह One Nation, One Education करो, One Nation, One Health करो, One Nation, One Justice करो, One Nation, One Food करो। हम लोगों के लिए क्या कर रहे हैं? आम जनता के लिए क्या कर रहे हैं? आम जनता की भी यही राय है, जिसे हमने लिखित रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि लोग ऐसा मानते हैं कि जब तक अलग-अलग राज्यों में चुनाव होते रहते हैं तब तक पेट्रोल की कीमतें बढ़ती रहती हैं। साथ ही हमारे विधायक गोपालभाई ने भी सुझाव दिया कि अगर ऐसा करना ही है तो एक समयावधि में सभी विधानसभा चुनाव हों और दूसरी समयावधि के बाद लोकसभा चुनाव हों। क्योंकि अगर विधानसभा भंग हो जाएगी तो उसके लिए क्या व्यवस्था करेंगे? राष्ट्रपति शासन कितने समय तक रहेगा? सरकारें गिरती हैं, गठबंधन होते हैं तो उसके लिए क्या व्यवस्थाएं होंगी? ऐसे सभी मुद्दे हमने JPC के सामने रखे हैं।

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