AAP विधायक चैतर वसावा पर आए कोर्ट के फैसले के बाद विधायक गोपाल इटालिया ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

AAP विधायक चैतर वसावा पर आए कोर्ट के फैसले के बाद विधायक गोपाल इटालिया ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

षड्यंत्र करके आदिवासी समाज की आवाज दबाने की जो कोशिश की गई है, उसका जवाब चैतर वसावा और आदिवासी समाज देगा: गोपाल इटालिया

आम आदमी पार्टी के डेडियापाड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक चैतर वसावा पर आए कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के विसावदर विधायक गोपाल इटालिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस अवसर पर मीडिया से बात करते हुए गोपाल इटालिया ने कहा कि पिछले कई वर्षों से गुजरात में आदिवासी समाज विभिन्न प्रकार के अन्याय और शोषण का शिकार होता रहा है। आदिवासियों की जमीनें विभिन्न सरकारी और निजी परियोजनाओं के नाम पर अधिग्रहित की जाती रही हैं, आदिवासी विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकारों के साथ अन्याय होता रहा है तथा आदिवासी क्षेत्रों में अनेक प्रकार की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे परिस्थितियों में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान आदिवासी समाज के लिए आशा की किरण के रूप में चैतर वसावा एक मजबूत नेता बनकर उभरे थे। विधानसभा चुनाव में विजय प्राप्त करने के बाद वे विधायक के रूप में पूरे गुजरात के आदिवासी समाज के सवालों और समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष करते रहे हैं। गोपाल इटालिया ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का मुद्दा हो, जमीन और जंगल पर अधिकारों का प्रश्न हो, ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता, अनुसूचित क्षेत्रों के अधिकार, खनन (माइनिंग) से जुड़े प्रश्न या आदिवासी बच्चों की शिक्षा और दस्तावेजीकरण से संबंधित मुद्दे हों – हर विषय पर चैतर वसावा ने मजबूती से आवाज उठाई है। चैतर वसावा ने आदिवासी समाज को न्याय दिलाने और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया है और समाज के अधिकारों के लिए अडिग रहकर कार्य किया है। चैतर वसावा को झुकाने, हराने और उनका मनोबल तोड़ने के लिए कई प्रयास किए गए। गृहमंत्री ने सभाएं कीं, प्रधानमंत्री ने डेडियापाड़ा में सभाएं कीं। कई मुद्दों पर चैतरभाई वसावा को दबाने का प्रयास किया गया। लेकिन चैतरभाई वसावा बिरसा मुंडा के वारिस हैं, वंशज हैं। वे इस दबाव के सामने नहीं झुके।

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आप विधायक गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि आज सरकारी मशीनरी का गलत उपयोग करके झूठी एफआईआर दर्ज की गई। सरकारी पंच, सरकारी वकील, सरकारी पुलिस और पूरे सरकारी तंत्र ने मिलकर चैतरभाई वसावा के खिलाफ झूठा षड्यंत्र रचा। कोर्ट द्वारा 7 वर्ष की सजा सुनाई गई। इससे पहले चैतरभाई को जेल में रखा गया और जेल के अंदर भी उन्हें कहा गया कि यदि पार्टी बदल लो तो तुरंत बाहर आ जाओगे। लेकिन चैतरभाई वसावा एक लड़ाकू इंसान हैं। वे आदिवासी समाज और गुजरात के लोगों के लिए लड़ने वाले व्यक्ति हैं, झुकने वाले नहीं। जब उन्हें जेल में रखा गया तब आदिवासी समाज ने चैतरभाई वसावा पर विश्वास व्यक्त किया। आदिवासी समाज ने जिला पंचायत, तालुका पंचायतों और नर्मदा जिला पंचायत में उन्हें समर्थन दिया। इसका कारण यह था कि आदिवासी समाज ने देखा कि चैतरभाई वसावा को दबाने की कोशिश की जा रही है। वर्षों बाद समाज के लिए बोलने वाला एक मजबूत व्यक्ति सामने आया है और उसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यह बात आदिवासी समाज ने समझी और चैतरभाई वसावा को विधायक पद के साथ-साथ जिला पंचायत में भी समर्थन दिया। जिसके कारण भाजपा में बेचैनी बढ़ी और उसके बाद अचानक सजा दी गई। सरकारी पंच, सरकारी पुलिस, सरकारी वकील, शिकायतकर्ता और सरकारी गवाह – सब कुछ सरकारी था। चैतरभाई वसावा ने गुजरात में जहां-जहां भाजपा के विचारों से असहमति दिखाई है, वहां उन्होंने लोगों के सवाल उठाए हैं। पुलिस स्टेशन में भी जनमत और लोगों के प्रश्नों को लेकर प्रस्तुतियां दी गई थीं। चैतरभाई वसावा अलग प्रकार के नेता हैं, क्योंकि वे डरते नहीं हैं, घबराते नहीं हैं और लगातार संघर्ष करते रहते हैं। वे विधानसभा से लेकर सड़क तक, गांव की गलियों से लेकर सर्वोच्च स्तर तक आदिवासी समाज के प्रश्नों के लिए आवाज उठाते रहे हैं। आज आदिवासी समाज नाराज है, दुखी है। आदिवासी समाज की आवाज को दबाने का जो काम किया गया है उसका जवाब चैतरभाई वसावा भी देंगे और आदिवासी समाज भी देगा। आज जो षड्यंत्र किया गया है, उसमें गवाह सरकारी, शिकायतकर्ता सरकारी, पुलिस सरकारी, वकील सरकारी, पंचनामा सरकारी – सब कुछ सरकारी है। इसलिए स्वाभाविक है कि चैतरभाई वसावा के खिलाफ एक षड्यंत्र रचा गया प्रतीत होता है।

आप विधायक गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि चैतरभाई वसावा को बार-बार कहा गया कि पार्टी बदल लो तो सब ठीक हो जाएगा। लेकिन उन्होंने पार्टी बदलने का रास्ता नहीं चुना। इसका अर्थ है कि चैतरभाई वसावा को फंसाने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया है। किसी भी तरह उनकी राजनीतिक पारी समाप्त हो जाए, वे आदिवासियों के लिए बोलना बंद कर दें और उनकी आवाज दब जाए, इसके लिए यह षड्यंत्र रचा गया है। लेकिन आम आदमी पार्टी चैतरभाई वसावा के साथ मजबूती से खड़ी है। आदिवासी समाज भी उनके साथ है। चैतरभाई वसावा कभी झुकने वाले नहीं हैं। हमारी सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की टीम सक्रिय है। गुजरात हाईकोर्ट के वकीलों की टीम भी कार्यरत है और हम भी सक्रिय हैं। हमारे पास जो भी कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं, उनका पूरा उपयोग किया जाएगा। जहां आवश्यकता होगी वहां तक हम ऊपरी अदालतों में जाएंगे और न्यायपालिका से न्याय की अपेक्षा रखेंगे। हम मानते हैं कि यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक रूप से प्रेरित है। गुजरात के इतिहास में कई गंभीर घटनाएं और मामले हुए हैं, गुजरात में भाजपा के लोगों ने कई गलत काम किए फिर भी उन्हें एक घंटे के लिए भी पुलिस स्टेशन में नहीं बैठाया जाता, तो चैतरभाई वसावा को यह सजा क्यों दी गई? क्या यह आदिवासियों के लिए बोलने की सजा है? क्या यह गुजरात के लोगों के प्रश्न उठाने की सजा है? क्या यह सत्ता के सामने न झुकने की सजा है? लेकिन हम संघर्ष जारी रखेंगे। ऐसे हालात हम पहले भी देख चुके हैं और इन परिस्थितियों से भी बाहर आएंगे। चैतरभाई वसावा गुजरात के लोकप्रिय नेता हैं और आगे भी लोगों के अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे।

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