Tuesday, July 21, 2026

सरकार ने किसानों को मुआवजे के नाम पर लॉलीपॉप दिया, खेतों में खंभे लगाने के मुद्दे पर AAP नेता इसुदान गढ़वी का भाजपा सरकार पर तीखा हमला

by Neha
सरकार ने किसानों को मुआवजे के नाम पर लॉलीपॉप दिया, खेतों में खंभे लगाने के मुद्दे पर AAP नेता इसुदान गढ़वी का भाजपा सरकार पर तीखा हमला

सरकार द्वारा कंपनियों को फायदा पहुंचाने की साजिश के खिलाफ किसानों के हित में 5 जुलाई को ‘आप’ का सामूहिक उपवास यथावत रहेगा: इसुदान गढ़वी

किसानों के खेतों में अवैध रूप से लगाए जा रहे बिजली कंपनियों के खंभों और टावरों के मुद्दे पर हाल ही में सरकार द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुआवजे की जो घोषणा की गई है, उस पर आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कड़े शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी है। इसुदान गढ़वी ने कहा कि, जब हम मजबूती से लड़ते हैं, तब सरकार को झुकना ही पड़ता है। टावर और खंभों के इस पूरे मामले में गुजरात के किसान अलग-अलग चरणों में एकजुट हुए और लंबी लड़ाई लड़ी, इसलिए सरकार झुकी तो सही, लेकिन केवल 10 प्रतिशत ही झुकी है, जबकि 90 प्रतिशत मामलों में अभी भी किसानों के साथ अन्याय हुआ है। सरकार की मुआवजा नीति की खामियों को उजागर करते हुए उन्होंने आगे कहा कि, सरकार ने घोषणा की है कि कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें सरकारी और कंपनी के मूल्यांकन करने वाले लोग जमीन की कीमत तय करेंगे। हमारा सवाल है कि कलेक्टर किस पक्ष को न्याय देगा? अब तक जब भी किसानों ने विरोध किया है, तब कलेक्टर के आदेश पर ही पुलिस किसानों पर लाठीचार्ज करने पहुंच जाती थी। तो ऐसी स्थिति में कलेक्टर निष्पक्ष रहकर किसानों को न्याय देंगे, इसकी क्या गारंटी है? मैं यह बात शुरू से ही कहता आया हूं। उन्होंने बाजार भाव के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि, आप आज के बाजार भाव पर मुआवजा देने की बात कर रहे हैं, लेकिन आज से 25 साल बाद उस जमीन की कीमत क्या होगी, इसकी गारंटी कौन देगा? इस बारे में सरकार ने कोई स्पष्टता नहीं दी है। इसी कारण मैंने कुछ समय पहले मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की थी कि जिला स्तर के बजाय राज्य स्तर (State Level) पर एक समान मुआवजा समिति और स्पष्ट ‘एसओपी’ (SOP) बनाई जाए। यदि नवसारी के किसान को एक करोड़ रुपये मिलते हैं, तो मोरबी और द्वारका के किसान को भी उतना ही मुआवजा मिलना चाहिए।

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इसुदान गढ़वी ने आरोप लगाया कि, किसानों को आज न तो अपनी फसल का उचित मूल्य मिल रहा है और न ही कोई मुआवजा, जिसके कारण वे कर्ज के बोझ तले खेती छोड़ रहे हैं। अब किसानों के पास केवल उनकी मां समान जमीन ही बची है, उस पर भी आप बिजली कंपनियों की ओर से अवैध रूप से घुसकर खंभे लगा रहे हैं। विरोध बढ़ने पर सरकार ने अब मुआवजे का लॉलीपॉप दिया है, जिसे आम आदमी पार्टी और गुजरात के किसान बिल्कुल स्वीकार नहीं करते। निजी कंपनियां इस समय अरबों रुपये कमाने के लिए खेतों में डेरा डाले बैठी हैं। कंपनियां पच्चीस साल बाद 50 या 100 रुपये प्रति यूनिट बिजली बेचकर करोड़ों रुपये कमाएंगी, जबकि किसान अपनी कीमती जमीन खोकर भी बर्बाद ही रहेगा। इसलिए सरकार को किसानों को मासिक किराया (Monthly Rent) देने की व्यवस्था करनी चाहिए। किसानों की सहमति के बिना कंपनियां उनकी जमीन पर कदम भी न रख सकें और यदि किसान मना करे तो पुलिस बल का उपयोग न किया जाए, इसकी लिखित गारंटी सरकार दे, यही हमारी मुख्य मांग है। सरकार केवल निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह लॉलीपॉप देकर खंभे लगाने का काम फिर से शुरू करवाने की साजिश रच रही है। इसलिए किसानों के अधिकारों की लड़ाई के लिए आम आदमी पार्टी द्वारा आगामी 5 जुलाई को आयोजित सामूहिक उपवास आंदोलन यथावत रहेगा। जब तक राज्य स्तरीय समिति और न्यायपूर्ण मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

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