AAP दिल्ली ने ‘पिंक पास’ व्यवस्था पर सवाल उठाए। महिला मुफ्त बस यात्रा योजना को लेकर पारदर्शिता, पास सिस्टम और निजी कंपनी की भूमिका पर राजनीतिक बहस तेज।
दिल्ली की राजनीति में महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा योजना एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। आम आदमी पार्टी (AAP) की दिल्ली इकाई ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट साझा करते हुए ‘पिंक पास’ व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह योजना मूल रूप से केजरीवाल सरकार द्वारा शुरू की गई थी, जिससे राजधानी की लाखों महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का लाभ मिल रहा था।
AAP ने आरोप लगाया है कि वर्तमान सरकार इस सुविधा को ‘पिंक पास’ के नाम से प्रचारित कर रही है, जबकि योजना पहले से लागू थी। पार्टी ने इसे लेकर पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
रेखा गुप्ता सरकार का नया फर्जीवाड़ा‼️
केजरीवाल सरकार द्वारा महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा शुरू की गई थी जिसका फायदा पूरी दिल्ली की महिलाएं उठा रही थीं, अब रेखा गुप्ता सरकार इस सुविधा को ‘पिंक पास’ के नाम से प्रचार करने में जुट गई है।
इससे जुड़े कुछ अहम सवाल हैं👇
👉 जब पुरुष… pic.twitter.com/xJNAg0VC4U
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) March 3, 2026
पास प्रणाली की आवश्यकता पर सवाल
AAP दिल्ली के मुताबिक, जब पुरुष इस योजना का लाभ नहीं ले सकते, तो अलग से ‘पिंक पास’ जारी करने की आवश्यकता स्पष्ट की जानी चाहिए। पार्टी ने यह भी प्रश्न उठाया कि क्या अब किसी पास के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि कौन महिला है और कौन नहीं।
निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने की आशंका
पार्टी ने अपने बयान में यह आशंका भी जताई है कि पास जारी करने की प्रक्रिया में किसी निजी कंपनी को अनुबंध दिए जाने की संभावना हो सकती है। AAP का कहना है कि यदि ऐसा है तो सरकार को पूरी प्रक्रिया और संभावित अनुबंधों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि, ‘पिंक पास’ व्यवस्था को लेकर सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नई प्रणाली लागू की जाती है, तो उसकी प्रक्रिया, उद्देश्य और लाभार्थियों पर प्रभाव स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है।
महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा योजना दिल्ली की प्रमुख सामाजिक योजनाओं में शामिल रही है। ऐसे में ‘पिंक पास’ को लेकर उठे सवालों के बीच अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है और सभी की निगाहें सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।