दिल्ली की अधीनस्थ अदालतों के सात न्यायाधीशों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पद की शपथ ली, जिससे उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 50 हो गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट में आज दिल्ली की अधीनस्थ अदालतों के सात न्यायाधीशों ने न्यायाधीश पद की शपथ ली है। इससे उच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़कर पच्चीस हो गई है। सुबह 10 बजे अदालत परिसर में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय ने सभी नए जजों को शपथ दिलाई। अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा, भरत पाराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज ने शपथ ली।
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दिल्ली उच्च न्यायालय को सात नए जज मिले
अब तक ये सभी जिला न्यायपालिका में काम कर रहे थे। उच्च न्यायालय परिसर में शपथ ग्रहण समारोह सुबह 10 बजे से शुरू हुआ। 19 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने इन नियुक्तियों की घोषणा की। बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के कुल अनुमोदित पद 60 हैं और हाईकोर्ट में कार्यरत जजों की संख्या 50 हो गई है, जो इन सात नई नियुक्तियों से बढ़ गई है।
दिल्ली उच्च न्यायालय का इतिहास
- 31 अक्टूबर 1966 को दिल्ली उच्च न्यायालय का गठन हुआ। लेकिन इससे पहले दिल्ली के न्यायिक इतिहास में कई परिवर्तन हुए:
- 1919 में बनाया गया लाहौर हाईकोर्ट पहले पंजाब और दिल्ली के मामलों को देखने का अधिकार था. 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे तक यह व्यवस्था जारी रही।
- 15 अगस्त 1947 को बाद में ‘पूर्वी पंजाब हाईकोर्ट’ का गठन हुआ। शिमला की पीटरहॉफ इमारत से काम शुरू हुआ, लेकिन जनवरी 1981 में जलकर खाक हो गई।
- 1954 से 1955 तक, पंजाब सरकार का कार्यालय चंडीगढ़ में स्थानांतरित हो गया, जिससे हाईकोर्ट भी चंडीगढ़ शिफ्ट हो गया। बाद में यह पंजाब हाईकोर्ट बन गया और दिल्ली के मामलों की सुनवाई के लिए एक सर्किट बेंच बनाया गया।
- फिर, दिल्ली की बढ़ती आबादी और महत्व को देखते हुए 5 सितंबर 1966 को संसद ने दिल्ली हाईकोर्ट एक्ट पास किया, जो 31 अक्टूबर 1966 को शुरू हुआ।
- शुरू में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के मामले भी देखे। इसकी एक बेंच शिमला की ‘रेवेन्सवुड’ इमारत में बैठती थी। 25 जनवरी 1971 को हिमाचल प्रदेश पूर्ण राज्य बन गया और इस व्यवस्था का अंत हुआ।
- दिल्ली हाईकोर्ट पहले चार जजों से बना था: चीफ जस्टिस के एस हेगड़े, जस्टिस आई डी दुआ, जस्टिस एच आर खन्ना और जस्टिस एस के कपूर। जजों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ी है, और आज कुल 60 पद मंजूर हैं (45 स्थायी और 15 अतिरिक्त जज)।