Saturday, September 19, 2026

PAVITRA- सॉफ्टवेयर वायु प्रदूषण नियंत्रण में वैज्ञानिक और डेटा-आधारित निर्णयों को प्रोत्साहित करेगा।

by editor
PAVITRA- सॉफ्टवेयर वायु प्रदूषण नियंत्रण में वैज्ञानिक और डेटा-आधारित निर्णयों को प्रोत्साहित करेगा।

PAVITRA – भारत के लिए वायु प्रदूषण प्रबंधन एवं हस्तक्षेप उपकरण विषय पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस अवसर पर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मंडल द्वारा किए जा रहे कई उपायों की जानकारी दी। RSPCB के अधिकारियों ने इस अवसर पर कार्यशाला में PAVITRA की कार्यप्रणाली, आंकड़ा विश्लेषण और व्यावहारिक उपयोग से संबंधित कई मुद्दों पर विशेषज्ञों से चर्चा की।

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Pavitra एक निर्णय-सहायक मंच है—

विशेषज्ञों ने कार्यशाला में बताया कि PAVITRA एक निर्णय-सहायक मंच है जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में प्रस्तावित नीतिगत और नियंत्रण उपायों के आधार पर वायु में सूक्ष्म कणों की सांद्रता में होने वाले बदलाव का आकलन किया जा सकता है. पीएम-2.5। इससे वायु गुणवत्ता प्रबंधन पर निर्णय लेने में वैज्ञानिक आधार मिलता है।

विशेषीकृत बहु-प्रदूषक उत्सर्जन सूची (Smog India) से PAVITRA के विभिन्न तकनीकी घटकों की जानकारी दी गई, जिसमें वायुमंडलीय परिवहन और रसायन विज्ञान आधारित मॉडल इनमैप-पवित्रा और ISRM-पवित्रा शामिल हैं। बताया गया कि स्मॉग इंडिया देश भर में विभिन्न प्रदूषकों के उत्सर्जन का विस्तृत आंकड़ा और भौगोलिक विवरण प्रदान करता है. PAVITRA वायुमंडलीय मॉडलिंग को जोड़कर विभिन्न हस्तक्षेपों के संभावित प्रभावों का अनुमान लगाया जा सकता है।

PAVITRA डैशबोर्ड का भी प्रत्यक्ष प्रदर्शन कार्यशाला में हुआ। इसके माध्यम से अधिकारियों को बताया गया कि परिवहन, उद्योग, कृषि अवशेष जलाने, ईंधन में बदलाव और अन्य स्रोतों से संबंधित नियंत्रण उपायों को लागू करने की स्थिति में उत्सर्जन और पीएम-2.5 के स्तर में संभावित परिवर्तन कैसे मापा जा सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि PAVITRA को आधारभूत आकलन, कार्ययोजना के लिए प्राथमिकता निर्धारण और विभिन्न संभावित परिस्थितियों के आधार पर योजना बनाने और लागू करने में तकनीकी सहायता के लिए प्रयोग किया जा सकता है। विभिन्न क्षेत्रों और प्रदूषण स्रोतों पर प्रदूषण के प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन इसके माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या सबसे महत्वपूर्ण है निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है।

यह कार्यशाला भी विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन को कम करने के उपायों पर चर्चा की। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं घरेलू क्षेत्र में एलपीजी का उपयोग बढ़ावा देना, घरों को विद्युतीकरण करना, कृषि अवशेषों को जलाने में कमी लाना और लघु और मध्यम उद्योगों में तकनीक और स्वच्छ ईंधन का उपयोग करना। साथ ही इन उपायों से संबंधित आंकड़ों के आधार पर उनके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजनाओं को अधिक लक्षित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक आंकड़ों और वायुमंडलीय मॉडलिंग का उपयोग किया जा सकता है। PavITRA जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म से नीति निर्माण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक जानकारी को व्यवहारिक निर्णयों से जोड़ने में सहायता मिलेगी।

गौरतलब है कि कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों में वैज्ञानिक आंकड़ों, तकनीकी मॉडलिंग और नवीनतम निर्णय-सहायक प्रणालियों का उपयोग बढ़ावा देना था।

PAVITRA परियोजना टीम, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे, ने इस अवसर पर प्रशिक्षण और तकनीकी सत्र आयोजित किए। PAVITRA परियोजना के प्रधान अन्वेषक प्रो. चंद्र वेंकटरामन, परियोजना प्रबंधक प्रिया अभिजीत चौधरी, शोध सहयोगी रुतुजा घाटे, शोध वैज्ञानिक डॉ. रोहित सिंह और शोध सहयोगी तेजस सरनाइक ने ऑनसाइट प्रशिक्षण दल में भाग लिया। PAVITRA परियोजना के सह-प्रधान अन्वेषक प्रो. श्रीनिधि बालासुब्रमणियन और पीएचडी शोधार्थी गिरिवेंद्र प्रताप यादव ने भी ऑनलाइन प्रशिक्षण और तकनीकी सत्रों में भाग लिया।

 

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