Thursday, September 17, 2026

सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी कौन थीं, जिसका गाना सुनकर निर्मला सीतारमण के आंसू बहने लगे।

by editor
सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी कौन थीं, जिसका गाना सुनकर निर्मला सीतारमण के आंसू बहने लगे।

निर्मला सीतारमण ने एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती पर उनका गीत सुनकर भावुक हो गईं। गाना गुनगुनाते हुए उनकी आंखों से आंसू बह निकले। महान गायिका की जिंदगी, उपलब्धियां और संगीत विरासत को जानिए।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को बेंगलुरु में एक कार्यक्रम में भावुक हो गईं। यह था कर्नाटक की प्रसिद्ध संगीत गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती का अवसर। महान गायिका का गीत बजते हुए निर्मला सीतारमण भावुक नजर आईं। सामने आए वीडियो में वह गीत के साथ गुनगुनाती हुई दिखाई देती है और उनकी आंखों से आंसू बहते हैं। कार्यक्रम में उन्होंने एमएस सुब्बुलक्ष्मी का संगीत, उनकी कला और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान को याद किया।

निर्मला सीतारमण गाना सुनकर हो गईं भावुक

एमएस सुब्बुलक्ष्मी का गीत कार्यक्रम के दौरान बजाया गया। यह सुनकर निर्मला सीतारमण बहुत भावुक हो गईं। वीडियो में वह गीत को ध्यान से सुनती और उसके साथ गुनगुनाती दिखती है। कुछ ही पलों बाद उनकी आंखें रोने लगीं। वित्त मंत्री ने एमएस सुब्बुलक्ष्मी के संगीत का जिक्र करते हुए उनकी कला और क्षमता का उल्लेख किया। निर्मला सीतारमण ने कहा कि कर्नाटक संगीत में भक्ति एक जीवंत आत्मा है और विभिन्न भाषाओं और आध्यात्मिक परंपराओं का सुंदर संगम इसे खास बनाता है। उनका कहना था कि एमएस सुब्बुलक्ष्मी ने अपनी कला से इस परंपरा को कई भाषाओं और आध्यात्मिक परंपराओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एमएस सुब्बुलक्ष्मी कौन थीं?

एमएस सुब्बुलक्ष्मी का पूरा नाम मदुरै षण्मुखवडिवु सुब्बुलक्ष्मी था। उन्होंने 16 सितंबर 1916 को तमिलनाडु के मदुरै में जन्म लिया था। वह संगीतमय परिवार में पली-बढ़ी थीं और बचपन से ही कर्नाटक संगीत का अध्ययन करने लगी थीं। बहुत कम उम्र में उन्होंने संगीत की दुनिया में अपनी कड़ी साधना और अद्भुत प्रतिभा से अलग पहचान बना ली थी। 20वीं सदी में भारतीय शास्त्रीय संगीत, विशेष रूप से कर्नाटक संगीत में एमएस सुब्बुलक्ष्मी का नाम बहुत सम्मानित किया गया था। उनकी आवाज में शास्त्रीय संगीत और भक्ति का ऐसा मेल था, जिसने उन्हें भारत के साथ-साथ दुनिया भर में लोकप्रियता दिलायी।

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भारत रत्न से सम्मानित पहली संगीतकार

एमएस सुब्बुलक्ष्मी को उनके संगीत योगदान के लिए देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न भी मिला। 1998 में वह भारत रत्न पाने वाली पहली संगीतकार बनीं। 1974 में उन्हें भी रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला था। वह पहली भारतीय संगीतकार थीं जिन्होंने यह सम्मान प्राप्त किया था। उनकी उपलब्धियाँ यहीं तक नहीं सीमित थीं। एमएस सुब्बुलक्ष्मी ने 1966 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया था। भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए यह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटना है। उनकी प्रस्तुति ने भारतीय आध्यात्मिक और संगीतिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर पहुँचाया। 2016 में संयुक्त राष्ट्र ने भी एक डाक टिकट जारी कर गायिका को सम्मानित किया।

भक्ति संगीत को अलग पहचान दी

एमएस सुब्बुलक्ष्मी की गायकी में भक्ति का विशेष स्थान था। उनकी रचनाएं संस्कृत, तमिल और अन्य भारतीय भाषाओं में भी हुईं। उनकी आवाज में भक्ति गीतों की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि आज भी लोग उनकी कई रचनाओं को सुनते हैं। निर्मला सीतारमण ने कहा कि उनकी प्रतिभा के पीछे बहुत कठोर बौद्धिक अनुशासन था। उन्हें सिर्फ अपनी आवाज से पहचान नहीं मिली, बल्कि वर्षों की मेहनत, प्रशिक्षण और समर्पण से संगीत की दुनिया में आज भी याद किया जाता है।

88  वर्ष की उम्र में निधन

एमएस सुब्बुलक्ष्मी का 11 दिसंबर 2004 को चेन्नई में निधन हो गया। वह आठवीं वर्ष की थीं। उनके निधन के बाद भी उनकी रिकॉर्डिंग्स, भजन और शास्त्रीय प्रस्तुतियां सुनी जाती रही हैं। उनकी आवाज और संगीत आज भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अब वे अपनी जिंदगी और संगीत यात्रा को बड़े पर्दे पर दिखाने के लिए भी तैयार हैं। अभिनेत्री रश्मिका मंदाना एमएस सुब्बुलक्ष्मी की भूमिका आगामी पैन-इंडियन बायोपिक में निभाती नजर आएंगी। फिल्म का संगीत अनिरुद्ध रविचंदर ने बनाया है।

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