Saturday, September 12, 2026

BRICS 2026: चीन के पास मैन्युफैक्चरिंग और रूस  के पास एनर्जी, भारत के पास क्या है खास

by editor
BRICS 2026: चीन के पास मैन्युफैक्चरिंग और रूस  के पास एनर्जी, भारत के पास क्या है खास

BRICS में शामिल सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अपनी अलग शक्ति के साथ खड़ी हैं। चीन विश्व फैक्ट्री बनाने की क्षमता रखता है, रूस ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि भारत ने BRICS के मंच पर कौन-सी विशिष्ट क्षमता लाया है?

ब्रिक्स (BRICS) संघ के प्रमुख सदस्यों के बीच हर देश की अपनी अलग ताकत है। चीन विश्व का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क है, रूस अपार तेल और गैस का भंडार है, और यूएई और सऊदी अरब जैसे नए सदस्यों के पास बहुत सी कैपिटल पूंजी है। यही कारण है कि इस शक्तिशाली मंच पर भारत की सबसे विशिष्ट और बलिष्ठ पहचान क्या है?

भारत ने नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), यूपीआई (UPI), फार्मास्यूटिकल्स और तकनीकी क्षमता को अपनी असली ताकत बताया है। भारत विश्व के सभी विकासशील देशों के विकास के लिए तकनीक का इसी मॉडल का उपयोग कर रहा है।

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1. डिजिटल युग

भारत ने दुनिया को वित्तीय समावेशन और डिजिटल कनेक्टिविटी में एक सफल उदाहरण दिया है। हर साल भारत में सिर्फ UPI से 250 अरब से अधिक डिजिटल लेनदेन होते हैं। यह विश्व भर में होने वाले कुल डिजिटल लेनदेन का पच्चीस प्रतिशत से भी अधिक है। भारत ने BRICS देशों को एक संयुक्त “डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) रिपोजिटरी” बनाने की सिफारिश की है। विभिन्न देशों के डिजिटल सिस्टम को आपस में जोड़ने का उद्देश्य स्थानीय मुद्रा में व्यापार और सीमा पार भुगतान को आसान बनाना है। ताकि देशों के बीच भुगतान तेज और आसान हो सके, भारत चाहता है कि BRICS देश UPI जैसे डिजिटल भुगतान प्रणाली से जुड़ें।

2. स्वास्थ्य सुरक्षा

भारत ने वैश्विक महामारी से लेकर सप्लाई चेन के मौजूदा संकट तक दुनिया की दवा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारत ने किफायती टीकों और जेनेरिक दवाओं का उत्पादन करके ब्रिक्स देशों के बीच स्वास्थ्य सुरक्षा में सबसे अग्रणी स्थान प्राप्त किया है।

3. स्किल्ड वर्कफोर्स और नई तकनीक

भारत का ध्यान आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्किल्ड कर्मचारियों की तैयारी पर है, जबकि चीन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर अधिक जोर दे रहा है। BRICS देशों में क्षमता निर्माण केंद्रों के माध्यम से भारत नई तकनीकों की ट्रेनिंग देने और वर्कफोर्स को भविष्य की आवश्यकताओं के लिए तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा है

भारत खुद को एक विश्वबंधु और विकासशील देशों के एक विश्वसनीय और निष्पक्ष साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है, जबकि पश्चिमी देशों और चीन के बीच तकनीकी और आर्थिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। भारत का इंसाफपसंद टेक्नोलॉजी मॉडल दूसरे देशों को आत्मनिर्भर बनाने देता है, जबकि चीन का मॉडल कर्ज और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर है। यही कारण है कि भारत का UPI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित फार्मास्यूटिकल्स BRICS के मंच पर भारत के लिए एक नया आर्थिक और सामाजिक रास्ता बन गया है।

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