Friday, August 14, 2026

चावल घोटाले पर सौरभ भारद्वाज का हमला, मंत्री मनजिंदर सिरसा की जांच की मांग

by Neha
चावल घोटाले पर सौरभ भारद्वाज का हमला, मंत्री मनजिंदर सिरसा की जांच की मांग

कथित चावल घोटाले को लेकर सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाए। निलंबित अधिकारी के जवाब का हवाला देकर मंत्री मनजिंदर सिरसा की भूमिका की जांच की मांग की।

दिल्ली में कथित चावल घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक निलंबित अधिकारी के कथित शो-कॉज नोटिस के जवाब का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि अधिकारी ने अपने जवाब में किसी मंत्री से मिले निर्देशों का उल्लेख किया है, तो उन निर्देशों की भी जांच क्यों नहीं की जा रही है।

सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे मामले में जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि किसी भी कथित अनियमितता की जांच केवल निचले स्तर के अधिकारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यदि किसी वरिष्ठ पदाधिकारी या मंत्री की भूमिका का आरोप सामने आता है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।

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निलंबित अधिकारी के जवाब को लेकर उठे सवाल

सौरभ भारद्वाज के दावे के मुताबिक, निलंबित अधिकारी ने अपने शो-कॉज नोटिस के जवाब में यह कहा है कि उसे संबंधित कार्यों को लेकर मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की ओर से निर्देश मिले थे। इसी दावे को आधार बनाकर AAP नेता ने सरकार से पूछा है कि यदि अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है, तो कथित तौर पर निर्देश देने वाले व्यक्ति की भूमिका की जांच क्यों नहीं की जा रही।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित शो-कॉज नोटिस की सार्वजनिक प्रति की पुष्टि आवश्यक है। इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

सौरभ भारद्वाज ने मंत्री पर कार्रवाई की मांग उठाई

सौरभ भारद्वाज ने सवाल किया कि यदि कथित चावल घोटाले में अधिकारी की भूमिका को लेकर कार्रवाई की जा सकती है, तो मामले में सामने आए मंत्री के कथित निर्देशों की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मनजिंदर सिंह सिरसा को पद से हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के बीच अब मुख्य सवाल यही है कि कथित अनियमितताओं में किस स्तर पर निर्णय लिए गए और जिम्मेदारी किसकी बनती है।

जांच से ही साफ होगी पूरी सच्चाई

कथित चावल घोटाले से जुड़े आरोप गंभीर हैं और ऐसे मामलों में दस्तावेजों, विभागीय रिकॉर्ड तथा संबंधित अधिकारियों के बयानों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि शो-कॉज नोटिस के जवाब में किसी वरिष्ठ पदाधिकारी के निर्देशों का उल्लेख वास्तव में किया गया है, तो जांच एजेंसी के लिए उन निर्देशों की प्रकृति और वैधता की पड़ताल करना अहम होगा।

फिलहाल इस मामले में आरोप और राजनीतिक दावे सामने आए हैं, जबकि जिम्मेदारी और दोष तय करने का फैसला सक्षम जांच या संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही किया जा सकता है।

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