Income Tax Return 2026: 31 अगस्त 2026 तक ITR दाखिल करना है। जानें ITR-3, ITR-4, ITR-5 और ITR-7 किसके लिए हैं और रिटर्न से पहले क्या जांचें।
Income Tax Return 2026: वित्त वर्ष 2025-26 यानी आकलन वर्ष 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है। पात्र टैक्सपेयर्स के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। ऐसे में टैक्सपेयर्स के लिए यह जानना जरूरी है कि उनकी आय और प्रोफाइल के हिसाब से कौन-सा ITR फॉर्म लागू होता है।
ITR-3 किसे भरना होगा?
ITR-3 मुख्य रूप से उन व्यक्तियों और HUF के लिए होता है, जिनकी आमदनी बिजनेस या प्रोफेशन से होती है। इसके अलावा ऐसे करदाता जिनकी आय सैलरी, पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, कैपिटल गेन या अन्य स्रोतों से है और वे ITR-1, ITR-2 या ITR-4 के तहत रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते, उनके लिए भी ITR-3 लागू हो सकता है।
ITR-4 किसके लिए है?
ITR-4 को आमतौर पर ‘Sugam’ फॉर्म के नाम से जाना जाता है। यह कुछ पात्र व्यक्तियों, HUF और निवासी फर्मों के लिए उपलब्ध है। इसमें मुख्य रूप से ऐसे करदाता शामिल होते हैं, जो निर्धारित शर्तों के तहत presumptive taxation scheme का लाभ लेते हैं।
ITR-4 दाखिल करने के लिए आय और कारोबार से जुड़ी कुछ निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले अपनी पात्रता जरूर जांच लें।
ITR-5 कौन भरता है?
ITR-5 फॉर्म आमतौर पर फर्म, LLP, AOP, BOI और कुछ अन्य संस्थाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह फॉर्म व्यक्तिगत करदाताओं, HUF और कंपनियों के लिए सामान्य ITR फॉर्म नहीं है।
जिन संस्थाओं पर आयकर कानून के तहत ITR-5 लागू होता है, उन्हें अपनी आय और टैक्स संबंधी जानकारी के आधार पर यह रिटर्न दाखिल करना होता है।
ITR-7 किसके लिए होता है?
ITR-7 कुछ विशेष व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए निर्धारित है, जिन्हें आयकर कानून की संबंधित धाराओं के तहत रिटर्न दाखिल करना होता है। इसमें कुछ ट्रस्ट, संस्थाएं और अन्य निर्धारित श्रेणियां शामिल हो सकती हैं। ITR-7 की पात्रता संस्था की प्रकृति और उस पर लागू आयकर कानून की धाराओं पर निर्भर करती है।
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ITR दाखिल करने से पहले इन चीजों की करें जांच
रिटर्न फाइल करने से पहले टैक्सपेयर्स को अपनी आय, निवेश, टैक्स कटौती और टैक्स क्रेडिट से जुड़ी जानकारी अच्छी तरह जांच लेनी चाहिए। Form 26AS, AIS और TIS में दर्ज जानकारी का अपनी वास्तविक आय और लेनदेन से मिलान करना जरूरी है।
इसके अलावा बैंक स्टेटमेंट, निवेश से जुड़े दस्तावेज, TDS की जानकारी और अन्य जरूरी कागजात भी तैयार रखें। गलत जानकारी के आधार पर ITR दाखिल करने से आगे चलकर परेशानी हो सकती है।
ITR जमा करने के बाद e-Verification भी जरूरी
ऑनलाइन ITR दाखिल करने के बाद टैक्सपेयर्स को रिटर्न का e-Verification पूरा करना होता है। केवल रिटर्न जमा करना पर्याप्त नहीं है। समय पर वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ही ITR फाइलिंग प्रक्रिया पूरी मानी जाती है।
31 अगस्त से पहले दाखिल करें ITR
31 अगस्त 2026 की अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते ITR दाखिल करना बेहतर है। आखिरी दिनों में पोर्टल पर ज्यादा ट्रैफिक या तकनीकी समस्या आने की संभावना रहती है।
टैक्सपेयर्स को अपनी आय और परिस्थितियों के अनुसार सही ITR फॉर्म चुनकर रिटर्न दाखिल करना चाहिए। अगर फॉर्म को लेकर कोई भ्रम है, तो टैक्स विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।