Tuesday, July 21, 2026

गोपाल इटालिया: चैतर वसावा का सबसे बड़ा ‘गुनाह’ आदिवासी समाज को जागरूक करना है

by Neha
गोपाल इटालिया: चैतर वसावा का सबसे बड़ा ‘गुनाह’ आदिवासी समाज को जागरूक करना है

जल, जमीन और जंगल के अधिकारों के लिए लड़ने वाले चैतर वसावा को भाजपा ने षड्यंत्रपूर्वक सजा दिलवाई : गोपाल इटालिया

आम आदमी पार्टी के विसावदर विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि चैतर वसावा का गुनाह क्या है? उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक सरकारी कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार किया। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे अपराध में सात साल की सजा होती है? यदि किसी सरकारी कर्मचारी के साथ कथित दुर्व्यवहार के लिए सात साल की सजा होती है, तो गुजरात की जनता को ठगने और अन्याय करने वालों को क्या सजा मिलनी चाहिए? वास्तविकता यह है कि चैतर वसावा का सबसे बड़ा ‘गुनाह’ आदिवासी समाज को जागरूक करना है। वे चुने जाने के बाद से लगातार आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ते रहे हैं। आदिवासी समाज को जागरूक करने का गुनाह, जल-जमीन-जंगल के लिए लड़ने का गुनाह, आदिवासी भाइयों के एसटी प्रमाणपत्र के मुद्दे पर आवाज उठाने का गुनाह, विभिन्न परियोजनाओं के नाम पर विस्थापित किए गए आदिवासियों को जमीन का अधिकार दिलाने के लिए लड़ने का गुनाह, फॉरेस्ट राइट एक्ट के तहत जंगल की जमीन के अधिकारों के लिए लड़ने का गुनाह, पिछड़े और श्रमिक आदिवासी वर्ग के लिए लड़ने का गुनाह, तथा आदिवासी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और फ्रीशिप दिलाने के लिए लड़ने का गुनाह — ऐसे अनेक ‘गुनाह’ चैतर वसावा ने किए हैं। इस प्रकार पूरे आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए और समाज को जागरूक करने के लिए लड़ने वाले चैतर वसावा के खिलाफ भाजपा ने कथित षड्यंत्र रचकर उन्हें सात साल की जेल की सजा दिलाने का काम किया है। सरकारी पुलिस, सरकारी शिकायतकर्ता, सरकारी गवाह और सरकारी वकीलों के माध्यम से चैतर वसावा को सजा दिलाई गई है, ऐसा हम मानते हैं।

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AAP विधायक गोपाल इटालिया ने आगे कहा कि अब चैतर वसावा का मामला जनता की अदालत में चलेगा। मैं पूरे गुजरात के युवाओं और विशेष रूप से आदिवासी समाज के युवाओं से अपील करता हूं कि अब हमें संकल्प लेना है। सभी आदिवासी युवा और समाज के लोग एकजुट होकर चैतर वसावा की पार्टी, आम आदमी पार्टी का समर्थन करें और भाजपा द्वारा किए गए कथित धोखे, षड्यंत्र और अन्याय का जवाब दें। इस मामले में जिस तेजी से कार्रवाई हुई और जिस तेजी से सजा सुनाई गई, वह भी कई सवाल खड़े करती है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में भी कई मामले वर्षों तक चलते हैं, लेकिन चैतर वसावा के मामले में बहुत तेजी से फैसला आया है। यह सजा केवल चैतर वसावा की नहीं है। यह सजा उन सभी लोगों की है, जिनके लिए चैतर वसावा लड़ते रहे हैं। शिक्षा में पीछे रह गए, रोजगार में पीछे रह गए, सामाजिक व्यवहार में पीछे रह गए और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासी समाज के हजारों युवाओं की यह पीड़ा है। मैं सभी युवाओं से अपील करता हूं कि चैतर वसावा को न्याय दिलाने के संघर्ष में शामिल हों। हम हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, सड़क और विधानसभा तक हर मंच पर यह लड़ाई लड़ेंगे। चैतर वसावा, आदिवासी समाज और गुजरात की जनता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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