पंजाब के सैनिक स्कूलों में पंजाबी को अनिवार्य विषय से हटाकर संस्कृत शामिल किए जाने पर AAP नेता हरपाल सिंह चीमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। इसे पंजाबी भाषा और संस्कृति पर हमला बताया गया।
पंजाब के सैनिक स्कूलों में शैक्षणिक विषयों में बदलाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार, इन स्कूलों में पंजाबी भाषा को अनिवार्य विषयों की सूची से हटाकर उसकी जगह संस्कृत को शामिल किया गया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
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AAP का कड़ा विरोध, भाषा और पहचान पर सवाल
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह कदम पंजाब, पंजाबी भाषा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सभी भाषाओं का सम्मान करती है, लेकिन पंजाब की मातृभाषा को कमजोर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ਭਾਜਪਾ ਦਾ “Anti Punjab” ਚਿਹਰਾ ਇੱਕ ਵਾਰ ਫ਼ਿਰ ਬੇਨਕਾਬ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਪੰਜਾਬ, ਪੰਜਾਬੀ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬੀਅਤ ਵਿਰੁੱਧ ਆਪਣੀ ਨਫ਼ਰਤ ਦਿਖਾਉਂਦੇ ਹੋਏ ਭਾਜਪਾ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸੈਨਿਕ ਸਕੂਲਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਪੰਜਾਬੀ ਨੂੰ ਲਾਜ਼ਮੀ ਵਿਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਕਰਕੇ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤ ਨੂੰ ਥਾਂ ਦੇ ਦਿੱਤੀ ਹੈ। ਇਹ ਸਿਰਫ਼ ਇੱਕ ਭਾਸ਼ਾ ਨੂੰ ਹਟਾਉਣ ਦਾ ਮਾਮਲਾ ਨਹੀਂ, ਸਗੋਂ ਪੰਜਾਬ… pic.twitter.com/f08JzbmO71
— Adv Harpal Singh Cheema (@HarpalCheemaMLA) May 12, 2026
“पंजाबी भाषा को कमजोर करने की कोशिश” का आरोप
हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि यह निर्णय पंजाब के बच्चों को उनकी जड़ों, संस्कृति और मातृभाषा से दूर करने जैसा है। उन्होंने इसे एक गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि यह पंजाब के स्वाभिमान से जुड़ा मामला है।
AAP सरकार का रुख
AAP नेताओं ने स्पष्ट किया है कि पंजाब सरकार मातृभाषा पंजाबी के सम्मान और संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का कहना है कि किसी भी भाषा के खिलाफ नहीं, लेकिन क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।