Saturday, April 18, 2026

AAP से भाजपा सरकार डरी”: MLA गोपाल इटालिया ने विधानसभा में चुनाव और ग्रांट असमानता पर उठाए सवाल

by Neha
AAP से भाजपा सरकार डरी”: MLA गोपाल इटालिया ने विधानसभा में चुनाव और ग्रांट असमानता पर उठाए सवाल

AAP विधायक गोपाल इटालिया ने विधानसभा में विधायकों की ग्रांट असमानता, विसावदर-सासण सड़क, चुनाव चर्चा और सदस्य निवास में लाइब्रेरी न होने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए और सरकार से सुधार की मांग की।

आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया ने गत 17 मार्च को विधानसभा में विभिन्न गंभीर मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि गुजरात में सभी विधायकों को ढाई करोड़ की ग्रांट मिलती है लेकिन यह ग्रांट समानुपातिक नहीं है, जिसके बारे में आज मैंने प्रस्तुति दी थी। जैसे कि सूरत की करंज विधानसभा में मतदाता पौने दो लाख भी नहीं हैं, जबकि अबडासा विधानसभा में पांच लाख मतदाता हैं, कामरेज में चार लाख मतदाता हैं, तो इस तरह हर विधानसभा में मतदाताओं की संख्या अलग-अलग है। लगभग डेढ़ लाख से लेकर साढ़े पांच लाख मतदाताओं वाली विधानसभा सीटें हैं, तो डेढ़ लाख की आबादी वाले क्षेत्र को भी ढाई करोड़ और साढ़े पांच लाख की आबादी वाले क्षेत्र को भी ढाई करोड़ की ग्रांट मिलना कैसे उचित है? तो किस विधानसभा में कितनी नगरपालिका है, कितने गांव हैं और यदि महानगर में है तो महानगर के कितने क्षेत्र में वह विधानसभा आती है, यह देखकर ग्रांट तय की जानी चाहिए। क्योंकि यदि 100% ग्रामीण क्षेत्र है तो वहां अधिक ग्रांट की जरूरत होती है और यदि 50% या उससे अधिक शहरी क्षेत्र है तो वहां कम ग्रांट की जरूरत होती है। जैसे सूरत और अहमदाबाद जैसे महानगरों का बजट ही 10-12 हजार करोड़ का होता है। ऐसे क्षेत्रों में अधिकांश काम कॉर्पोरेशन द्वारा किए जाते हैं, इसलिए शहरों से आने वाले विधायकों को सड़क, रास्ता, गटर, बाग-बगीचे के लिए विशेष बजट की जरूरत नहीं होती। जबकि गांवों में यह सभी काम विधायकों को ही करने पड़ते हैं। इसलिए ग्रामीण क्षेत्र, शहरी क्षेत्र, सीमावर्ती क्षेत्र, वन क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र—इन सभी बातों को ध्यान में रखकर विधायकों की ग्रांट आवंटित की जानी चाहिए। मेरे मत क्षेत्र में लगभग 160 गांव और एक नगरपालिका है, इसलिए मुझे मिलने वाली ग्रांट इन सभी 160 गांवों के लिए पर्याप्त नहीं है। इस विषय पर आज मैंने सरकार का ध्यान आकर्षित किया है और आशा है कि सरकार इस पर सुधार करेगी।

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आगे विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि दूसरा एक गंभीर मुद्दा यह है कि विसावदर से सासण का रास्ता 20 साल से नहीं बना है। काछिया नेस से सासण का रास्ता 14 किलोमीटर का है, लेकिन यह रास्ता 20 साल से नहीं बनने के कारण विसावदर के लोगों को मेंदरड़ा होकर 65 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। साथ ही धारी तालुका, बगसरा तालुका, तालाला तालुका, मेंदरड़ा तालुका, भेसाण तालुका और विसावदर तालुका के लोगों को भी परेशानी होती है। पिछली बार सरकार ने 242 करोड़ रुपये इस सड़क के लिए मंजूर किए थे, लेकिन सड़क बनी ही नहीं और बजट खर्च हो गया। इस बार बजट में 272 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस सड़क के न बनने के मुद्दे पर मैंने सरकार के मंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलकर प्रस्तुति दी और अध्यक्ष के माध्यम से विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाया। तो आशा है कि अब यह काम पूरा होगा।

आगे विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि एक और गंभीर बात यह है कि भाजपा सरकार ने चुनाव को गायब करने की साजिश की। चुनाव पर वर्षों से विधानसभा में चर्चा होती रही है, लेकिन इस बार भाजपा ने यह सुनिश्चित किया कि चुनाव पर चर्चा न हो। मैंने सुबह प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के माध्यम से सदन का ध्यान इस ओर दिलाया कि चुनाव पर चर्चा क्यों नहीं हुई? सरकार ने नौ तारीख को लिखित रूप में दिया था कि चुनाव पर चर्चा होगी और इस पर काप प्रस्ताव भी रखा गया था, मैंने स्वयं भी काप प्रस्ताव रखा था। लेकिन आज भाजपा सरकार चुनाव की चर्चा से भाग गई। यह बात दिखाती है कि भाजपा सरकार आम आदमी पार्टी से डरती है। सरकार ने स्थानीय स्वराज चुनाव के लिए 240 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, तो फिर इस पर चर्चा क्यों नहीं हुई? 240 करोड़ रुपये जनता के पैसे हैं, इसलिए इस पर चर्चा होनी चाहिए थी। लेकिन चर्चा नहीं हुई, इसलिए मैं इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं और अपना विरोध दर्ज करता हूं।

आगे विधायक गोपाल इटालिया ने कहा कि साथ ही मैंने यह भी मुद्दा उठाया कि 200 करोड़ रुपये के खर्च से विधायकों के लिए नए निवास बनाए गए हैं, लेकिन पूरे परिसर में कहीं भी लाइब्रेरी नहीं है। आज विधायकों के रहने के लिए बनाए गए सदस्य निवास में कई विधायक अपने परिवार के साथ रहते हैं, उनके बच्चे पढ़ते होंगे, साथ ही कई विधायक अध्ययनशील भी होते हैं और पढ़ने की आदत रखते हैं तथा विधानसभा की जानकारी पढ़ने में रुचि रखते हैं। मैंने अपना उदाहरण भी दिया कि यदि मुझे संसदीय प्रणाली और विधानसभा की पुरानी चर्चाओं के बारे में पढ़ना हो तो मैं कहां जाऊं? तो 200 करोड़ रुपये के खर्च से बने सदस्य निवास में एक लाइब्रेरी तो होनी ही चाहिए। वहां कंप्यूटर होने चाहिए, प्रिंटर भी होने चाहिए और किताबें भी होनी चाहिए। इस मुद्दे पर आज मैंने प्रस्तुति दी है, लेकिन सवाल यह है कि अब वे लोग लाइब्रेरी कहां बनाएंगे? पूरे कैंपस में खेल का कोर्ट बनाया, स्विमिंग पूल बनाया, गार्डन बनाया, तो लाइब्रेरी कहां गई? आज मैंने ये सभी मुद्दे सरकार के सामने रखे हैं और आशा है कि सरकार इस पर काम करेगी।

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