कैला देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि मेला 16 मार्च से शुरू। बिना बिजली के दीपक की रोशनी में माता के दर्शन और ऐतिहासिक मंदिर का भव्य अनुभव, जानें मंदिर का इतिहास।
राजस्थान के करौली जिले में स्थित कैला देवी मंदिर में 16 मार्च से चैत्र नवरात्रि मेला शुरू हो गया है। यह मेला 1 अप्रैल तक चलेगा और माता के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से यहां आते हैं। इस मंदिर की परंपरा और इतिहास बेहद रोचक हैं, खासकर गर्भगृह में बिजली न होने के कारण यहां माता के दर्शन दीपक की रोशनी में ही होते हैं।
चैत्र नवरात्रि मेला 2026 में भक्तों की भव्य भागीदारी
कैला देवी मेला 16 मार्च से 1 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। भक्त पैदल यात्रा या कांवड़ यात्रा करके माता के दर्शन करते हैं। मंदिर ट्रस्ट और पुलिस प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए रैंप, 11 व्हीलचेयर और 5 ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है। भीड़ नियंत्रण के लिए 12 इमरजेंसी गेट बनाए गए हैं।
बिजली नहीं, केवल दीपक की लौ में होते हैं दर्शन
कैला देवी मंदिर में सालों से यह परंपरा निभाई जा रही है कि गर्भगृह में किसी भी प्रकार की बिजली नहीं लगाई जाती। भक्त माता के दर्शन केवल दीपक की रोशनी में करते हैं, जो इस मंदिर को और भी पवित्र और आकर्षक बनाता है।
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माता कैला और भगवान कृष्ण का गहरा संबंध
स्कंद पुराण के अनुसार, मां कैला देवी आदिम शक्ति और महायोगिनी महामाया का अवतार हैं। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने नंद और यशोदा के घर में जन्म लिया और बाद में भगवान कृष्ण के बचपन की सुरक्षा में योगदान दिया।
कैला देवी मंदिर का ऐतिहासिक विवरण
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यह मंदिर यदुवंशी राजाओं की कुलदेवी के रूप में प्रसिद्ध है।
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कैलादेवी की प्रतिमा की स्थापना 1114 ईस्वी में महात्मा केदार गिरि ने की थी।
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1116 ईस्वी में राजा मुकुंद दास खींची ने लघु मंदिर का निर्माण करवाया।
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करौली के यदुवंशी शासकों ने मंदिर की देखभाल का जिम्मा संभाला।
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वर्ष 1723 में राजा गोपाल सिंह ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया।
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मंदिर में माता कैला के साथ मां चामुंडा जी की भी प्रतिमा स्थापित है।
कैला देवी मंदिर का यह अनोखा मेला और दीपक रोशनी में माता के दर्शन का अनुभव श्रद्धालुओं के लिए एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रस्तुत करता है।