भारत और EU के FTA में मोदी सरकार ने किसानों का खास ध्यान रखा। डेयरी, गेहूं, चावल, दाल, चाय और कॉफी जैसे संवेदनशील उत्पाद सुरक्षित, जानें पूरी डिटेल।
भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत में मोदी सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों के हितों को विशेष प्राथमिकता दी। बातचीत में भारत ने कई संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा और इनमें डेयरी, गेहूं, चावल, दालें, चाय, कॉफी और जेनेटिकली मॉडिफाइड उत्पाद (GM) शामिल हैं। इन प्रोडक्ट्स पर किसी भी प्रकार की इम्पोर्ट ड्यूटी में छूट नहीं दी गई है।
किसानों के हितों की सुरक्षा
मोदी सरकार का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका सीधे प्रभावित होती है। एक अधिकारी ने बताया कि भारत ने डेयरी सेक्टर को हमेशा सुरक्षित रखा है और किसी भी FTA में इस पर छूट नहीं दी जाएगी। इसके अलावा भारत ने मछली और समुद्री उत्पाद, पोल्ट्री, चीज़, मक्का, कॉर्न, मेवे, खाद्य तेल, फल, सब्जियां, मसाले और तंबाकू जैसे अन्य संवेदनशील सेक्टर भी सुरक्षित किए हैं।
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EU ने किन उत्पादों को डील से बाहर रखा?
FTA समझौते में यूरोपीय यूनियन ने भी कुछ उत्पादों को डील के दायरे से बाहर रखा। इनमें मांस और मांस से जुड़े प्रोडक्ट्स, शहद, चावल, डेयरी प्रोडक्ट्स, चीनी और तंबाकू शामिल हैं। 27 देशों के इस समूह ने इन सेक्टर्स को संरक्षित रखा है।
भारत के उत्पादों को EU में छूट मिलेगी
FTA के तहत भारत के कई कृषि उत्पादों को यूरोपियन मार्केट में टैरिफ में छूट मिलेगी, जिससे भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। मसाले, टेबल ग्रेप्स, चाय और कॉफी जैसे उत्पादों की लगभग 87% टैरिफ लाइनों में प्राथमिक पहुँच EU मार्केट में सुनिश्चित की गई है।
इसके अलावा, यूरोपियन यूनियन कुछ समुद्री उत्पादों पर मौजूदा 0 से 26% तक के शुल्क को कम करेगा, जिससे भारत के समुद्री उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में EU का समुद्री आयात बाजार लगभग 4.67 लाख करोड़ रुपये का है। इस FTA से भारत के किसानों और निर्यातकों को दोनों को ही लाभ मिलने की उम्मीद है।