CM Yogi Adityanath ने आज अपने आधिकारिक आवास पर पीसीएस-2022 बैच के 7 प्रशिक्षु अधिकारियों और 2023 बैच के 38 प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ बातचीत की। उन्होंने प्रशिक्षुओं को उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध राज्य में सेवा करने का विशेषाधिकार और एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी बताया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सफल प्रशासनिक जीवन के लिए अपनी कार्य शैली में ‘संवाद’, ‘संवेदनशीलता’ और ‘सकारात्मकता’ को शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक 5-6 वर्ष अधिकारियों के व्यवहार और दृष्टिकोण को निर्धारित करते हैं, जो आने वाले दशकों के लिए मार्गदर्शक प्रकाश बन जाते हैं।
उन्होंने प्रशिक्षुओं से सार्वजनिक संपर्क बढ़ाने, निष्पक्ष रूप से निर्णय लेने और गरीब और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील होने की अपील की। भूमि विवाद, माप और बाड़ लगाने जैसे मामलों में देरी को लोगों में असंतोष का कारण बताते हुए मुख्यमंत्री ने उनसे इन मुद्दों पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को न्याय देने का माध्यम बनना चाहिए न कि देरी का कारण।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे जनहित को सर्वोपरि रखें, निर्णयों में ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि शासन में सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास है, जो न केवल व्यवस्था में सुधार लाता है, बल्कि दक्षता भी बढ़ाता है।
उन्होंने प्रशिक्षुओं की ऊर्जा, नवीन सोच और समर्पण को राज्य की प्रशासनिक प्रणाली को एक नई दिशा देने वाला बताया। उन्होंने सभी अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और विश्वास व्यक्त किया कि उनके योगदान से उत्तर प्रदेश की नीतियों और आम जनता के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इस अवसर पर डिप्टी कमिश्नर रामवीर, एसडीएम संगरूर यशपाल शर्मा, सहायक कमिश्नर (यूटी) देवदर्शनदीप सिंह, ईओ रमेश कुमार, सभी स्थानीय कांग्रेसी नेता व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।