अगर आप लगातार थकान, मांसपेशियों में खिंचाव, दिल की धड़कनों में अनियमितता या नींद से जुड़ी परेशानियों का अनुभव कर रहे हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके शरीर में Magnesium की कमी है। ऐसे में लक्षण दिखते ही जांच करवाना और समय पर इलाज लेना फायदेमंद हो सकता है।
मैग्नीशियम की कमी: कारण और प्रभाव
Magnesium एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है जो हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों की कार्यक्षमता, हृदय गति और तंत्रिका तंत्र को संतुलित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी और असंतुलित खानपान की वजह से बड़ी संख्या में लोगों में इसकी कमी देखी जाती है।
मैग्नीशियम की कमी क्यों होती है?
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गलत खानपान – मैग्नीशियम की कमी का सबसे सामान्य कारण है पोषक तत्वों से भरपूर आहार की कमी। खासतौर पर जब भोजन में हरी सब्जियां, साबुत अनाज, फल और नट्स शामिल न हों।
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पेट की बीमारियां – क्रॉनिक डायरिया, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) या सीलिएक डिजीज जैसी स्थितियों में शरीर मैग्नीशियम को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता।
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कुछ दवाएं – लंबे समय तक डाययूरेटिक या एंटीबायोटिक दवाएं लेने से मैग्नीशियम की मात्रा शरीर से बाहर निकल सकती है।
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अल्कोहल का अधिक सेवन – यह भी शरीर में मैग्नीशियम की कमी की एक अहम वजह बन सकता है।
कमी के लक्षण और असर
शुरुआत में इसके लक्षण मामूली लग सकते हैं जैसे – थकान, भूख की कमी, मांसपेशियों में जकड़न या ऐंठन। लेकिन यदि इसे अनदेखा किया गया तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं:
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बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन या झनझनाहट
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नींद में बाधा और चिड़चिड़ापन
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दिल की धड़कनों में अनियमितता
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ब्लड प्रेशर का बढ़ना, हड्डियों का कमजोर होना
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थायरॉयड या डायबिटीज से जुड़ी परेशानियां
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डिप्रेशन और माइग्रेन का बढ़ता खतरा
रोकथाम और इलाज
इस कमी को दूर करने के लिए डाइट में बदलाव सबसे कारगर उपाय है:
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हरी पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक, बथुआ, मैथी)
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मेवे (जैसे बादाम, काजू)
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बीज (फ्लैक्स सीड्स, सूरजमुखी के बीज)
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साबुत अनाज और दालें
अगर पाचन संबंधी समस्याएं या दवाओं के कारण यह कमी हो रही हो, तो डॉक्टर से परामर्श लेकर मैग्नीशियम सप्लिमेंट्स भी लिए जा सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें – बिना जांच के सप्लिमेंट लेना नुकसानदेह हो सकता है क्योंकि अत्यधिक मैग्नीशियम भी शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकता है।