महिलाओं को उम्र बढ़ने के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। खासकर 50 वर्ष की उम्र के बाद Bones कमजोर होना और जोड़ों में दर्द की शिकायत आम हो जाती है।
महिलाओं में 50 की उम्र के बाद मेनोपॉज शुरू हो जाता है, यानी पीरियड्स बंद हो जाते हैं। इस दौरान उनके शरीर में कई तरह की समस्याएं सामने आने लगती हैं, जैसे वजन बढ़ना, बाल झड़ना, कमजोरी और थकान। इसके साथ ही Bones कमजोर होना भी आम समस्या बन जाती है। महिलाओं की हड्डियां उम्र के साथ कमजोर क्यों होती हैं, ये किन बीमारियों का संकेत हो सकता है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है,
50 वर्ष के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन तेजी से घटने लगता है। हार्मोन की कमी के कारण Bones कमजोर हो जाती हैं, जो ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी का लक्षण हो सकता है। इस बीमारी में हड्डियां इतनी नाज़ुक हो जाती हैं कि मामूली गिरने या झटके से भी फ्रैक्चर हो सकता है। अगर किसी महिला को लगातार पीठ या कमर में दर्द, कंधों का झुकाव, बार-बार फ्रैक्चर होना, बिना बड़ी चोट के हाथ-पैरों में हल्का दर्द या भारीपन महसूस हो रहा हो, तो ये ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत टेस्ट कराना जरूरी है।
Bone Mineral Density Test (DEXA Scan) — इससे Bones में मौजूद कैल्शियम और मिनरल्स की मात्रा का पता चलता है। इसके अलावा विटामिन डी, विटामिन बी12 और कैल्शियम के टेस्ट भी जरूरी हैं। यदि इन टेस्टों में कमी पाई जाती है ध्यान रखें कि किसी भी हड्डी की कमजोरी से जुड़े लक्षणों को अनदेखा न करें।
इन बातों का रखें ध्यान:
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डाइट में कैल्शियम और विटामिन D शामिल करें
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दूध, दही, पनीर, तिल, सोया और हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं
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सूरज की रोशनी से विटामिन D प्राप्त करें
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जरूरत हो तो डॉक्टर से सप्लिमेंट लें
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धूम्रपान और शराब से दूर रहें
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नियमित जांच कराते रहें
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खासकर अगर परिवार में किसी को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या रही हो, तो सावधानी ज्यादा बरतें