अगर आप menopause की अवस्था में हैं, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। आमतौर पर 40 से 55 साल की उम्र के बीच हर महिला इस चरण से गुजरती है। यह शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों का एक सामान्य हिस्सा है, जिसमें कई तरह के बदलाव महसूस होते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि अलग-अलग उम्र में क्या बदलाव होते हैं और कैसे इस दौरान सही देखभाल की जाए।
प्री-मेनोपॉज और पोस्ट-मेनोपॉज में अंतर और लक्षण
menopause का मतलब होता है जब महिला को लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स न आएं। इसे महिला की प्रजनन क्षमता का अंत भी माना जाता है क्योंकि इसके बाद गर्भधारण संभव नहीं होता। यह उम्र हर महिला के लिए अलग-अलग हो सकती है — कुछ को 40 की उम्र में मेनोपॉज हो जाता है, जबकि कुछ में 55 की उम्र के बाद भी नहीं होता।
मेनोपॉज एक दिन में नहीं आता, बल्कि यह एक प्रक्रिया है जिसमें तीन चरण होते हैं — प्री-मेनोपॉज (Perimenopause), मेनोपॉज (Menopause) और पोस्ट-मेनोपॉज (Postmenopause)। यह बदलाव महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन की मात्रा में गिरावट की वजह से होता है।
प्री-मेनोपॉज:
यह अवस्था तब होती है जब पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं और हार्मोन का स्तर गिरने लगता है। आमतौर पर यह 35 से 45 साल की उम्र में देखा जाता है।
लक्षण:
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पीरियड्स का असमान चक्र
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हॉट फ्लैशेस (अचानक गर्मी लगना)
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रात को पसीना आना
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मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन
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नींद में दिक्कत
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यौन इच्छा में कमी
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बाल झड़ना और त्वचा का रूखापन
पोस्ट-मेनोपॉज:
जब लगातार एक साल तक पीरियड्स न आएं, तो महिला पोस्ट-मेनोपॉज की स्थिति में आ जाती है। भारत में यह आमतौर पर 50 से 55 वर्ष की महिलाओं में देखा जाता है।
लक्षण:
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हॉट फ्लैशेस और तेज पसीना
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वेजाइना में ड्राइनेस
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थकान और कमजोरी
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मूड में बदलाव
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एकाग्रता में कमी
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जोड़ों में दर्द
इन चरणों में क्या करें?
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कैल्शियम और विटामिन D युक्त आहार लें
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नियमित व्यायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करें
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भरपूर पानी पिएं और संतुलित भोजन करें
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स्ट्रेस कम करें और पर्याप्त नींद लें
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डॉक्टर से नियमित जांच करवाएं
इन चरणों में सही देखभाल से मेनोपॉज को आरामदायक और संतुलित तरीके से पार किया जा सकता है।