Iron की कमी और थैलेसीमिया में क्या अंतर होता है? समझिए दोनों स्थितियों के बीच का फर्क।

by editor
Iron की कमी और थैलेसीमिया में क्या अंतर होता है? समझिए दोनों स्थितियों के बीच का फर्क।

शरीर में Iron की कमी और थैलेसीमिया दोनों ही स्थितियाँ खून की कमी से जुड़ी होती हैं और हीमोग्लोबिन के स्तर को प्रभावित करती हैं, लेकिन इनमें अहम फर्क होता है। दोनों समस्याएं अगर समय रहते न संभाली जाएं तो गंभीर रूप ले सकती हैं। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि ये दोनों बीमारियां किस तरह अलग हैं और इन्हें कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।

Iron की कमी और थैलेसीमिया दोनों ही बीमारियां खून को प्रभावित करती हैं, लेकिन ये एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होती हैं और इनका इलाज भी अलग तरीकों से किया जाता है। दोनों ही स्थितियां गंभीर हो सकती हैं और अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो मरीज की जान को खतरा हो सकता है। इन दोनों समस्याओं में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है।

जब शरीर में Iron की कमी होती है, तो एनीमिया की समस्या हो सकती है। आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन का स्तर घट जाता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। वहीं, थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है। हालांकि, दोनों ही स्थितियों में शरीर में खून की कमी देखी जाती है।

थैलेसीमिया में शरीर में हीमोग्लोबिन का उत्पादन कम हो जाता है। यह बीमारी हल्की से लेकर गंभीर तक हो सकती है। अगर यह मामूली स्तर की हो, तो अधिक सतर्कता की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन गंभीर स्थिति में मरीज को लगातार निगरानी और नियमित इलाज की जरूरत होती है।

कैसे पता चलता है:
 केवल लक्षणों के आधार पर यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि व्यक्ति को Iron की कमी है या थैलेसीमिया है। इसकी पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट करवाना ज़रूरी होता है। ब्लड टेस्ट से यह पता चलता है कि व्यक्ति को आयरन की कमी है या वह थैलेसीमिया से पीड़ित है।
थैलेसीमिया का पता CBC (Complete Blood Count) जांच से चलता है, जबकि आयरन की कमी जानने के लिए शरीर में आयरन लेवल और Iron स्टोरेज की जांच की जाती है।

प्रबंधन कैसे करें:
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है जो माता-पिता से बच्चों में आती है। इससे बचाव के लिए शादी से पहले थैलेसीमिया की जांच करवाना ज़रूरी है। यदि कोई भी व्यक्ति इस बीमारी का वाहक है, तो डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही परिवार बढ़ाने का निर्णय लेना चाहिए। चूंकि इसका पूर्ण इलाज संभव नहीं है, इसलिए इसे नियंत्रित करके ही जीवन जीना पड़ता है।

वहीं दूसरी ओर, आयरन की कमी का इलाज संभव है। इसमें दवाओं के साथ-साथ संतुलित आहार अपनाकर और आयरन युक्त खाद्य पदार्थों को खाने से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

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