Heart Transplant : एक 49 वर्षीय मरीज को 35 साल की महिला डोनर ने नया दिल देकर जिंदगी का तोहफा दिया है। यह मामला सिर्फ एक मेडिकल उपलब्धि नहीं, बल्कि इंसानियत और आधुनिक चिकित्सा तकनीक के बेहतरीन समन्वय का उदाहरण है। आखिर किन परिस्थितियों में हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है,
Heart Transplant एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें किसी मरीज के खराब या फेल हो चुके दिल को निकालकर उसकी जगह एक स्वस्थ दिल लगाया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर तब की जाती है जब मरीज का दिल गंभीर रूप से काम करना बंद कर देता है और बाकी इलाज से फायदा नहीं होता। ऐसे में मरीज की जान बचाने के लिए एक नया दिल प्रत्यारोपित करना ज़रूरी हो जाता है। इसके लिए जरूरी है कि कोई डोनर या उसके परिवार वाले अंगदान के लिए सहमत हों। जब ऐसा हो जाता है, तभी मरीज को नया दिल ट्रांसप्लांट किया जा सकता है।
Heart Transplant के दौरान एक और बड़ी चुनौती होती है ,डोनर के दिल को एक शहर से दूसरे शहर तक सुरक्षित और समय पर पहुंचाना। इस काम में डॉक्टरों, ट्रैफिक पुलिस, पुलिस बल और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम को समन्वय में काम करना पड़ता है। दिल को सुरक्षित और तेज़ी से ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंचाने के लिए ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाया जाता है, जिससे ट्रैफिक रोका जा सके और ट्रांसप्लांट में देरी न हो।
इसमें ट्रैफिक को एकतरफा (वन-वे) कर दिया जाता है, यानी ग्रीन कॉरिडोर के रास्ते पर सामान्य वाहनों या पैदल चलने वालों को जाने की अनुमति नहीं होती। बिना ग्रीन कॉरिडोर के दिल को सुरक्षित और समय पर पहुंचाना नामुमकिन होता है। दिल्ली में रविवार को भी ऐसा ही एक अद्भुत पल देखने को मिला, जिसने इंसानियत, मेडिकल साइंस और ट्रैफिक पुलिस की बेहतरीन टीमवर्क को सामने ला दिया।
मानवता और तकनीक का अनूठा संगम
दिल्ली और गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस के सहयोग के बिना यह मिशन सफल नहीं हो सकता था। साथ ही, उन्होंने डोनर परिवार को उनके दान और मानवता के लिए धन्यवाद दिया। यह घटना दिखाती है कि कैसे मेडिकल विज्ञान और मानवता मिलकर चमत्कार कर सकते हैं।