2026 में वैष्णो देवी यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए नए नियम जारी। यात्रा अब 24 घंटे के भीतर पूरी करनी होगी। जानें नए नियम और मंदिर के धार्मिक महत्व।
अगर आप साल 2026 में वैष्णो देवी जाने का प्लान कर रहे हैं, तो यह जरूरी है कि आप यात्रा के नए नियमों से अवगत हों। अब श्रद्धालुओं को मंदिर दर्शन करने और बेस कैंप लौटने के लिए एक सीमित समय में यात्रा पूरी करनी होगी।
वैष्णो देवी यात्रा के नए नियम
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यात्रा नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार:
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श्रद्धालुओं को RFID यात्रा कार्ड जारी होने के 10 घंटे के भीतर यात्रा शुरू करनी होगी।
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दर्शन और यात्रा पूरी करके कटड़ा बेस कैंप 24 घंटे के अंदर लौटना अनिवार्य है।
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यह नियम सभी यात्रियों पर लागू होगा, चाहे आप पैदल, हेलिकॉप्टर, पालकी या रोपवे से यात्रा करें।
यह नियम यात्रियों की बढ़ती संख्या और सुरक्षित प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है।
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वैष्णो देवी मंदिर: आस्था और धार्मिक महत्व
वैष्णो देवी का मंदिर जम्मू-कश्मीर में स्थित है और हिंदुओं में अत्यंत पूजनीय माना जाता है। मंदिर तक 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है, और रास्ते में कई धार्मिक स्थल आते हैं, जैसे:
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बाणगंगा
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अर्द्धकुंवारी
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सांझी छत
ग्रंथों के अनुसार, अर्द्धकुंवारी गुफा में माता ने कन्या रूप में नौ महीनों तक तपस्या की थी।
भैरव का शरीर गुफा में मौजूद
वैष्णो देवी की प्राचीन गुफा विशेष महत्व रखती है क्योंकि यहाँ भैरव का शरीर मौजूद है। कहा जाता है कि माता ने भैरव को अपने त्रिशूल से मारा था, और उसका सिर भैरव घाटी में चला गया, जबकि शरीर गुफा में रह गया।