उत्तराखंड राज्य 27 जनवरी 2025 को यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस ऐतिहासिक कदम के तहत सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
सीएम धामी ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद जनता में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है और विवाह पंजीकरण के लिए नागरिक तेजी से आगे आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कानून में सभी नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी शामिल है और इसका उद्देश्य महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार प्रदान करना है।
विवाह पंजीकरण में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार, 27 जनवरी 2025 से लागू कानून के पहले छह महीनों में विवाह पंजीकरण की संख्या तीन लाख से अधिक हो गई, जबकि पुराने कानून के तहत 2010 में छह महीनों में केवल 3.30 लाख विवाह पंजीकरण हुए थे। प्रतिदिन औसत विवाह पंजीकरण 67 से बढ़कर 1634 तक पहुंच गया।
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यूसीसी के मुख्य लाभ
यूसीसी कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियम शामिल हैं। इसके लागू होने से महिलाओं को बहुविवाह और हलाला जैसी प्रथाओं से सुरक्षा मिली है। कानून में सभी धर्मों के लिए विवाह की उम्र और तलाक प्रक्रिया के कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।
सीएम धामी ने यह निर्णय पहली कैबिनेट बैठक में ही लिया था और सभी औपचारिकताओं और जनमत संग्रह के बाद यह कानून 27 जनवरी 2025 से लागू किया गया। इस कदम को उत्तराखंड में सामाजिक न्याय और समान अधिकारों की दिशा में एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।