उत्तर प्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले पर शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में मुहर लग सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में यह बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदेश के बुजुर्गों के लिए घर बैठे वृद्धावस्था पेंशन योजना का प्रस्ताव रखा जाएगा। अब बुजुर्गों को पेंशन प्राप्त करने के लिए किसी कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना होगा। सरकार फोन कॉल के माध्यम से यह जानने की कोशिश करेगी कि क्या वे वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करना चाहते हैं। सहमति मिलने पर, एक सरल प्रक्रिया के तहत पेंशन शुरू हो जाएगी।
इस कैबिनेट बैठक में कुल 15 से अधिक प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें प्रदेश के औद्योगिक विकास, उच्च शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। बैठक के बाद, मुख्यमंत्री सभी मंत्रियों के साथ एक और बैठक करेंगे, जिसमें इन फैसलों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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कैबिनेट में रखे जाने वाले प्रमुख प्रस्ताव
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वृद्धावस्था पेंशन योजना: उत्तर प्रदेश सरकार वृद्धावस्था पेंशन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए फैमिली आइडी से जोड़ने जा रही है। यह नई सुविधा बुजुर्गों को बिना किसी परेशानी के घर बैठे पेंशन प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी।
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औद्योगिक विकास प्रस्ताव: प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्लेज योजना में संशोधन का प्रस्ताव रखा जा सकता है। इसके साथ ही, अशोक लीलैंड को लखनऊ में अपना प्लांट स्थापित करने के लिए और अधिक भूमि देने का प्रस्ताव भी स्वीकृत हो सकता है।
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गन्ना मूल्य और जेपी को राशि की वापसी: गन्ना मूल्य में वृद्धि और जेपी ग्रुप द्वारा भूमि के बदले दी गई धरोहर राशि की वापसी का प्रस्ताव भी इस बैठक में रखा जा सकता है।
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स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय: शाहजहांपुर में स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है, जो उच्च शिक्षा को बढ़ावा देगा और क्षेत्र के छात्रों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
अन्य प्रस्ताव
बैठक में राजस्व विभाग और न्यायिक सेवाओं से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा हो सकती है। इनमें कानूनगो के चपरासी (चैन मैन) को लेखपाल के पद पर पदोन्नति देने के लिए यूपी लेखपाल सेवा नियमावली में संशोधन, दस वर्ष तक के किरायेदारी पट्टे पर स्टांप ड्यूटी में छूट और खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय के गठन का प्रस्ताव शामिल है।
इसके अलावा, न्यायिक सेवा और उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारियों को कार खरीदने के लिए सरकार द्वारा आसान शर्तों पर कर्ज देने का प्रस्ताव, राज्य संपत्ति विभाग द्वारा पुराने वाहनों की जगह नए वाहन खरीदने और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विभिन्न पदों के उन्नयन पर भी चर्चा हो सकती है।