Yogi Govt : यदि किसी सदस्य की मृत्यु, इस्तीफ़ा या किसी अन्य कारण से पद से हटना होता है, तो नए सदस्य की नियुक्ति बोर्ड के अन्य सदस्य बहुमत से करेंगे। इस अधिसूचना की सबसे अहम बात यह है कि ट्रस्ट में शामिल सरकारी अधिकारियों को मतदान का अधिकार नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास 2025 अध्यादेश को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार, 26 मई को अधिसूचित कर दिया। अधिसूचना के मुताबिक, श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट में कुल 18 सदस्य होंगे।
इन सदस्यों में जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर आयुक्त, उत्तर प्रदेश बृज तीर्थ विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, उत्तर प्रदेश धर्मार्थ विभाग का एक अधिकारी, बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के साथ-साथ 11 साधु-संत और दो सेवायत शामिल होंगे।
पदेन सदस्य के रूप में 7 अधिकारी – पैराफ्रेस्ड संस्करण:
अधिसूचना के अनुसार, ट्रस्ट बोर्ड में दो श्रेणियों के सदस्य होंगे। इनमें से सात सदस्य स्वचालित रूप से अपने पद के कारण शामिल होंगे यानी ये पदेन अधिकारी होंगे।
इसके अतिरिक्त, अन्य 11 सदस्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से चुने जाएंगे, जिनमें संत, मुनि, गुरु, विद्वान, मठाधीश, महंत, आचार्य, स्वामी, शिक्षाविद, उद्यमी, समाजसेवी और श्री बांके बिहारी मंदिर के गोस्वामी—राजभोग और शयन भोग सेवायत—शामिल होंगे।
दो बार से अधिक नियुक्ति नहीं – पैराफ्रेस्ड:
सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्षों का निर्धारित किया गया है और कोई भी व्यक्ति दो बार से ज्यादा इस पद पर नियुक्त नहीं हो सकेगा। ट्रस्ट में केवल वे लोग सदस्य बन सकेंगे जो हिंदू और सनातन धर्म के अनुयायी हों। कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए किसी भी व्यक्ति को ट्रस्ट की सदस्यता नहीं दी जाएगी।
बहुमत से नए सदस्य की नियुक्ति – पैराफ्रेस्ड:
यदि किसी सदस्य का निधन हो जाता है, वह इस्तीफा दे देता है या किसी अन्य वजह से पद खाली होता है, तो उस स्थान पर नए सदस्य की नियुक्ति ट्रस्ट के अन्य सदस्यों द्वारा बहुमत के आधार पर की जाएगी।
अधिसूचना में यह विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि ट्रस्ट में शामिल सरकारी अधिकारियों को मतदान का अधिकार नहीं होगा। वे केवल बैठक में भाग ले सकेंगे और अपनी राय रख सकेंगे।
तीन माह में एक बैठक अनिवार्य – पैराफ्रेस्ड:
ट्रस्ट बोर्ड की बैठक हर तीन महीने में कम से कम एक बार आयोजित की जानी अनिवार्य होगी।
इसी बीच, योगी सरकार द्वारा प्रस्तावित बिहारी जी मंदिर कॉरिडोर के खिलाफ सेवायत रसिक राज गोस्वामी और देवेंद्र नाथ गोस्वामी द्वारा दाखिल पुनर्विचार याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।