देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और जलभराव से Malaria का खतरा बढ़ गया है.
बारिश के मौसम में गंदा पानी और नमी मच्छरों के पनपने का कारण बनती है, जिससे Malaria फैलाने वाले परजीवी तेजी से सक्रिय हो जाते हैं. मलेरिया खून के जरिए फैलने वाली गंभीर बीमारी है, खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है. अगर समय पर पहचान न हो तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं.
आमतौर पर मलेरिया के लक्षणों में बार-बार बुखार आना, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द, थकान और कमजोरी शामिल हैं. कई मामलों में उल्टी, पेट दर्द और खून की कमी भी देखने को मिलती है. बच्चों में लक्षण तेजी से बढ़ सकते हैं. इसके बावजूद कई बार टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आती है, जबकि मरीज में मलेरिया जैसे सभी लक्षण मौजूद रहते हैं.
क्यों आता है टेस्ट नेगेटिव?
शुरुआती दिनों में खून में परजीवी बहुत कम मात्रा में होते हैं, जिससे सामान्य जांच उन्हें पकड़ नहीं पाती. कभी-कभी परजीवी लिवर या किसी अन्य अंग में छिप जाते हैं और खून में नहीं मिलते. गलत जांच पद्धति, मशीन की क्षमता, या मरीज द्वारा पहले से दवा लेने की स्थिति में भी रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है.
ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टर दोबारा जांच कराने की सलाह देते हैं और Rapid Diagnostic Test (RDT) या Blood Smear Test से पुष्टि करते हैं. इसके अलावा, डेंगू, टाइफाइड और वायरल फीवर जैसी बीमारियों के लक्षण भी मलेरिया जैसे लग सकते हैं.
बचाव के उपाय
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मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें.
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घर के आसपास पानी जमा न होने दें.
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लक्षण दिखते ही डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें.
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रिपोर्ट नेगेटिव आए लेकिन लक्षण बने रहें तो दोबारा टेस्ट कराएं.
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बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें.
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स्वच्छता और हाइजीन बनाए रखें.
यानी मलेरिया जैसे लक्षणों को हल्के में न लें. रिपोर्ट निगेटिव आए तो भी सतर्क रहें और समय पर सही जांच और इलाज कराएं.