मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में सीआरपीएफ द्वारा आयोजित पूर्व अर्द्ध सैनिक सम्मेलन में भाग लिया और सैनिकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन योद्धाओं ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की बाजी लगाई, उनके योगदान की कोई कीमत नहीं आंकी जा सकती। उन्होंने इस सम्मेलन में भाग लेने वाले पूर्व अर्द्ध सैनिकों को सम्मानित किया और उनकी बहुमूल्य सेवा को सलाम किया।
सैनिकों के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास का एक नया युग शुरू हुआ है। राज्य सरकार उत्तराखंड की संस्कृति और पहचान को बनाए रखने के लिए संकल्पित है।” उन्होंने यह भी कहा कि अर्द्ध सैनिकों ने हमेशा देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया और उनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान पूर्व अर्द्ध सैनिकों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने सैन्य कल्याण के लिए समर्पण की भावना दिखाते हुए सरकार की नीतियों के प्रति सकारात्मक रुख अपनाया।
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देश में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति
धामी ने कहा कि आज हम छोटे-छोटे रक्षा उपकरणों के लिए अन्य देशों पर निर्भर नहीं हैं। मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत अब रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहा है और हमारी राज्य उत्पाद निर्यात क्षमता 30 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने वाली है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पहाड़ों में कुछ ऐसे तत्व घुसपैठ कर रहे हैं जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देंगे। हमारी सरकार पहाड़ों में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।”
सांस्कृतिक सुरक्षा का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने उत्तराखंड की भूमि पर अवैध कब्जे और सांस्कृतिक बदलाव की कोशिशों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने 10,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करा लिया है और राज्य में ‘लव जिहाद’ जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड की पहचान को “सच्ची और साफ” बताते हुए कहा कि राज्य के लोग पूरे देश में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उत्तराखंड की सरकार अपनी नीतियों के साथ जनहित को सर्वोपरि रखकर काम कर रही है और भविष्य में राज्य के विकास में यह योगदान बढ़ता रहेगा।