Restless Leg Syndrome : अगर आपको सोते समय बार-बार पैरों को हिलाने की आदत है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (Restless Leg Syndrome ) या RLS का संकेत हो सकता है। यह स्थिति केवल थकान नहीं, बल्कि ऐसी परेशानी है जिसमें पैरों में असहजता, झनझनाहट, जलन या खिंचाव महसूस होता है, जिससे व्यक्ति बार-बार पैर हिलाने के लिए मजबूर हो जाता है।
क्या है Restless Leg Syndrome ?
यह एक ऐसी स्थिति है जो व्यक्ति की नींद की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करती है और दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी ला सकती है। RLS का असर कई बार केवल पैरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह हाथों तक भी महसूस हो सकता है।
मुख्य लक्षण:
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आराम करने या सोने के समय पैरों में बेचैनी
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पैरों को हिलाने की लगातार इच्छा
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पैरों में गुदगुदी, झनझनाहट या जलन
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बार-बार नींद टूटना
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दिन में नींद पूरी न होने की वजह से थकान और चिड़चिड़ापन
किन वजहों से हो सकता है Restless Leg Syndrome ?
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शरीर में आयरन की कमी: इससे दिमाग में डोपामिन लेवल बिगड़ता है, जिससे यह समस्या उत्पन्न हो सकती है।
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डायबिटीज या किडनी से जुड़ी समस्याएं: नसों को नुकसान पहुंचने पर पैरों में असहजता होती है।
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पार्किंसन रोग: यह भी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिससे शरीर में कंपन और RLS जैसे लक्षण होते हैं।
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गर्भावस्था (विशेषकर आखिरी महीनों में): हार्मोनल बदलाव और पोषक तत्वों की कमी से यह समस्या बढ़ सकती है।
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नींद की गड़बड़ी या अनियमित दिनचर्या: नींद की गुणवत्ता पर असर पड़ने से यह सिंड्रोम ट्रिगर हो सकता है।
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आनुवंशिक कारण या दवाओं के दुष्प्रभाव: जैसे कि एंटीडिप्रेसेंट्स या मतली की दवाएं।
अगर समय पर ध्यान न दिया गया तो?
अगर इस समस्या को गंभीरता से न लिया जाए, तो यह क्रॉनिक इंसोम्निया जैसी नींद से जुड़ी गंभीर समस्या का कारण बन सकता है। इससे मानसिक तनाव, डिप्रेशन, थकान और कार्यक्षमता में कमी हो सकती है।
उपचार और बचाव के उपाय:
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आयरन की कमी हो तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें।
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कैफीन, शराब और धूम्रपान से दूर रहें।
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सोने से पहले हल्की एक्सरसाइज या पैरों की मालिश करें।
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नींद का एक निश्चित रूटीन अपनाएं।
अगर आप या आपके किसी करीबी को नींद में बार-बार पैरों को हिलाने की आदत है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह रेस्टलेस लेग सिंड्रोम हो सकता है। समय रहते इलाज और जीवनशैली में बदलाव कर इस परेशानी से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।